मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को इस आरोप को खारिज किया कि एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का मामला राजनीति से प्रेरित है और यह अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि पवार के खिलाफ ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किए जाने में बीजेपी नीत राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
नवी मुंबई के वाशी इलाके में शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे के साथ एक कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद फडणवीस ने कहा, ‘कोई भी व्यक्ति जो राजनीति को समझता है, वह जानता है कि राज्य इस तरह का (बदले की राजनीति जैसा) कोई कदम नहीं उठा सकता क्योंकि ईडी राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र में नहीं आता। जो दोषी हैं, उन्हें सजा मिलेगी। जो दोषी नहीं हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता।’

इससे पहले, नैशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने अपने ऊपर लगे सहकारी बैंक घोटाले के आरोप पर कहा कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में पूरा सहयोग करेंगे। वह 27 सितंबर को ईडी के सामने पेश होंगे। बता दें कि ईडी की कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए शरद पवार ने सीएम देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा था।

शरद पवार बोले- रैली में भीड़ देखकर दर्ज हुआ केस
मनी लॉन्ड्रिंग केस में मुकदमा दर्ज होने पर जब शरद पवार से पूछा गया कि क्या ऐसा इसलिए हुआ है कि महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ वह मुखर हैं, इसपर शरद ने कहा, 'इसके लिए मुझे सीएम देवेंद्र फडणवीस से संपर्क करना पड़ेगा।' पवार ने इससे पहले कहा था कि उनकी रैलियों में जबरदस्त भीड़ देखकर ऐसे केस राजनीतिक से प्रेरित होकर दर्ज करवाए गए हैं। पवार ने कहा है कि वह ईडी को जांच में पूरा सहयोग करेंगे और 27 सितंबर को पेश करके सारी जानकारी देंगे।

'मुझे देश के संविधान पर भरोसा'
पवार ने यह भी कहा कि अगले महीने चुनाव हैं। ऐसे में वह ज्यादातर समय जिले में रहेंगे लेकिन जांच के लिए उपस्थित रहेंगे। उन्होंने ने कहा, 'ऐसी स्थिति में जांच करने वाली एजेंसी को मेरी उपस्थिति चाहिए हो तो उन्हें यह गलतफहमी न रहे कि मैं उपलब्ध नहीं हूं।' महाराष्ट्र के पूर्व सीएम ने यह भी कहा कि वह संविधान पर भरोसा करते हैं।

70 लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस
ईडी ने मंगलवार को शरद पवार और अजीत पवार समेत 70 लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य मामलों में केस दर्ज किया है। इस घोटाले में मुंबई पुलिस की ओर से पिछले महीने एक एफआईआर दर्ज की गई थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में कोर्ट में पेश किए गए तथ्यों के आधार पर शरद पवार और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। साल 2007 से 2011 के बीच हुए इस घोटाले में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों के बैंक अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।