प्रस्तावक विधायक अभिलाष पांडेय, विधायक जबलपुर उत्तर,प्रस्ताव संस्कृत भाषा के संरक्षण हेतु ध्यानाकर्षण प्रस्ताव,मध्य प्रदेश के विद्यालयों में संस्कृत शिक्षकों की भारी कमी को दूर करने की मांग,संस्कृत भाषा के संवर्धन और संरक्षण पर बल।

विधानसभा के इतिहास में पहली बार किसी विधायक द्वारा प्रश्न संस्कृत भाषा में पूछा गया। सरकार की ओर से पहली बार उत्तर भी संस्कृत भाषा में दिया गया, जिसे शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने स्वयं पढ़कर सुनाया।

शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह का उत्तर (संस्कृत में): उन्होंने संस्कृत भाषा के समर्थन में स्पष्ट रूप से कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत त्रिभाषा फॉर्मूला जल्द लागू किया जाएगा। अब विद्यालयों में एक भाषा की बजाय व्यावसायिक शिक्षा को भाषा के विकल्प के रूप में शामिल किया जाएगा।

राज्य सरकार द्वारा कुछ जिलों में संस्कृत, वैदिक एवं योग शिक्षा को एक साथ देने वाले संस्थानों की स्थापना की जा रही है। यह शिक्षा एकीकृत कैंपस मॉडल के तहत दी जाएगी। वर्ष 2014 में प्रदेश में केवल 34 संस्कृत विद्यालय थे। वर्ष 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 271 हो गई है, जो सरकार के प्रयासों की सकारात्मक दिशा को दर्शाता है।

विधानसभा में संस्कृत भाषा का उपयोग एक ऐतिहासिक कदम है, जो राज्य सरकार की भारतीय संस्कृति और भाषा संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विधायक अभिलाष पांडेय और शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के इस योगदान से संस्कृत भाषा को नया प्रोत्साहन मिला है और आने वाले समय में विद्यालयों में इसकी स्थिति और सुदृढ़ होगी।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal