मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने मंत्रालय में पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत आने वाली कुंभराज परियोजना की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर, पारदर्शिता के साथ और तय समयसीमा में विकास कार्य पूरे करें।

मंत्री सिलावट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश को दी गई यह महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजना वास्तव में मध्यप्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक सौगात है। उन्होंने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का नदी जोड़ो का सपना, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में साकार हो रहा है। यह परियोजना प्रदेश के किसानों और नागरिकों के जीवन में जल-संपन्नता और समृद्धि का नया अध्याय जोड़ेगी।”

परियोजना की प्रमुख बातें : पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से
➤ 6 लाख 11 हजार 50 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
➤ 40 लाख से अधिक लोगों को पेयजल सुविधा मिलेगी।
➤ गुना जिले की चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र के किसान सबसे अधिक लाभान्वित होंगे।
➤ कुंभराज परियोजना इस लिंक योजना का सबसे बड़ा घटक है।

विकास की रफ्तार और प्रशासनिक गंभीरता बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता श्री विनोद देवड़ा, सांसद श्री रोडमल नागर, विधायक श्रीमती प्रियंका पेंची, तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर गुना ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।

मंत्री सिलावट ने बताया कि परियोजना वर्ष 2023 में प्रारंभ की गई थी और इसे वर्ष 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में भूमि अधिग्रहण, डिजाइन अनुमोदन और प्रारंभिक निर्माण कार्य तेज गति से चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग के अभियंता और अधिकारी इस परियोजना को लेकर अत्यंत गंभीर हैं, और तकनीकी दृष्टि से उपयुक्त स्थलों पर ही निर्माण कार्य किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या न आए।

कुंभराज परियोजना पर भ्रांतियों का निवारण मंत्री सिलावट ने स्पष्ट किया कि कुंभराज परियोजना से जुड़ी कुछ भ्रांतियां निराधार हैं। यह परियोजना पर्यावरणीय मानकों के पूर्ण पालन के साथ आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा, “कुंभराज परियोजना प्रदेश की जीवन रेखा बनने जा रही है। इससे न केवल किसानों को पानी मिलेगा बल्कि उद्योगों और गांवों में जल संकट भी दूर होगा।”

पुनर्वास और सामाजिक संवेदना:बैठक में प्रभावित परिवारों के भू-अर्जन और पुनर्वास कार्य शासन के नियमों के अनुसार समय सीमा में पूरे करने के निर्देश दिए गए। जनप्रतिनिधियों ने विस्थापित परिवारों के लिए विशेष पैकेज की मांग रखी, जिस पर मंत्री सिलावट ने आश्वासन दिया कि इस विषय पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा की जाएगी।

केंद्र-राज्य की साझा प्रतिबद्धता: इस अनूठी परियोजना में केंद्र सरकार 90% राशि और राज्य सरकार केवल 10% राशि का वहन कर रही है। मंत्री सिलावट ने कहा कि “यह योजना प्रधानमंत्री मोदी के ‘समृद्ध किसान – समृद्ध भारत’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जब यह परियोजना पूर्ण होगी, तब मध्यप्रदेश के जल संसाधनों की तस्वीर ही बदल जाएगी।” मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा “हर खेत तक पानी पहुंचाना, हर घर में स्वच्छ जल पहुंचाना, यही हमारे जल संसाधन विभाग का संकल्प है। यह परियोजना केवल तकनीकी नहीं, बल्कि भावनात्मक और राष्ट्रीय दृष्टि से भी गौरव का विषय है।”

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal