भोपाल 3दिसम्बर/मध्यप्रदेश में महिला बाल विकास को नई रफ़्तार सीएम ने दिए समीक्षा बैठक में कड़े और दूरगामी निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की व्यापक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, सीएम सचिव नीरज मंडलोई, जनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना,मंत्री निर्मला भूरिया,विभाग की सचिव जीवी रश्मी, आयुक्त निधि निवेदिता, विशेष सहायक विशाल नाडकर्णी सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सीएम ने विभागीय योजनाओं, भर्ती, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ी प्रगति की विस्तार से समीक्षा कर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।
देश में पहली बार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की पूर्णत: ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया लागू करने पर मुख्यमंत्री ने विभाग की सराहना की। 19,500 रिक्त पदों में से 9,948 नियुक्ति आदेश जारी हो चुके हैं। टेक-होम राशन की FRS प्रक्रिया में मध्यप्रदेश देश में प्रथम रहा तथा बच्चों को लाभ पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। वहीं, स्पॉन्सरशिप योजना के अंतर्गत 20,243 बच्चों को लाभ मिला—देश में दूसरा स्थान।
सीएम ने लाड़ली लक्ष्मी बेटियों के ड्रॉपआउट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, अधिकारियों को सख़्त निगरानी और प्रभावी रोकथाम के निर्देश दिए। 2047 विज़न के अनुरूप शाला-पूर्व शिक्षा में बड़ा निवेश, निपुण भारत आधारित विकास कार्ड से गुणवत्ता सुधार की दिशा में कदमों को आगे बढ़ाने पर बल दिया।
झाबुआ के ‘मोटी आई’ नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार मिलने पर विभाग की सराहना की गई। PM JANMAN भवनों की डिज़ाइन व रियल-टाइम मॉनिटरिंग मॉड्यूल को भारत सरकार ने विशेष सराहा—20 मीटर जियो-फेंसिंग आधारित उपस्थिति व्यवस्था डिजिटल पारदर्शिता की मिसाल बनी।
बैठक में निर्णय हुआ कि 2026 से शहरी आंगनवाड़ियों में सेंट्रल किचन से गर्म भोजन उपलब्ध होगा। अगले तीन वर्षों में 9,000 नए आंगनवाड़ी भवन बनाए जाएंगे। कुपोषण समाप्त करने के लिए मुख्यमंत्री ने तीन वर्ष की फुल-प्रूफ कार्ययोजना, ब्रेस्ट फीडिंग जागरूकता बढ़ाने तथा सामग्री टेंडर प्रक्रिया में शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए—गड़बड़ी पाए जाने पर वरिष्ठ अधिकारी होंगे जिम्मेदार।
लाड़ली बहना योजना के तहत जनवरी 2024 से नवंबर 2025 तक 36,778 करोड़ का अंतरण, PMMVY में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को 512 करोड़, तथा महिला हेल्पलाइन व वन स्टॉप सेंटरों के माध्यम से 2 लाख से अधिक महिलाओं को सुरक्षा-सहायता प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा—“महिला और बाल कल्याण मध्यप्रदेश की सर्वोच्च प्राथमिकता है, हर योजना का प्रभाव जमीन पर दिखना चाहिए।”

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