“2 दिसंबर की वह रात आज भी रोंगटे खड़े कर देती है”

भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी पर मध्य प्रदेश सरकार के गैस राहत एवं पुनर्वास मंत्री विजय शाह, मंत्रीगणों, अधिकारियों एवं सर्वधर्म समाज के संतों ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में सभी ने दिवंगत आत्माओं के प्रति पुष्पांजलि अर्पित कर 1984 की हृदय विदारक घटना को याद किया।

सर्वधर्म समाज ने मिलकर दी श्रद्धांजलि विभिन्न धर्मों के संतों ने अपने-अपने धार्मिक विधानों के अनुसार प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी सिर्फ एक औद्योगिक हादसा नहीं था, बल्कि मानवता पर पड़ा सबसे बड़ा घाव था, जिसकी पीड़ा आज भी महसूस होती है।
संतों ने प्रभावित परिवारों के साथ संवेदनाएं व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं के शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना की।

मंत्री विजय शाह बोले—“2 दिसंबर 1984 की रात भूली नहीं जा सकती”

अपने भावुक संबोधन में मंत्री विजय शाह ने उस काली रात की भयावहता को याद करते हुए कहा—

“2 दिसंबर 1984 की वह रात आज भी रोंगटे खड़े कर देती है।”

“3 दिसंबर की सुबह जब सड़कों पर नज़र पड़ी तो हर तरफ लाशें बिखरी थीं, मानो पूरा शहर मौत की चपेट में हो।”

“गली-कूचों में मरे हुए जानवरों की इतनी अधिकता थी कि वह मंजर किसी फिल्म का दृश्य नहीं, एक जीवंत भयावह सच्चाई थी।”

“उस समय धर्म, जाति या वर्ग की कोई दीवार नहीं थी—सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे की मदद में मानवता के सर्वोच्च धर्म का पालन कर रहे थे।” मंत्री शाह ने कहा कि राज्य सरकार त्रासदी से प्रभावित सभी परिवारों के पुनर्वास, स्वास्थ्य और न्याय के लिए लगातार कार्य कर रही है। इस त्रासदी के हर पीड़ित की स्मृति राज्य के इतिहास का हिस्सा है और रहेगा।

“भोपाल की पीड़ा को कभी भुलाया नहीं जा सकता” कार्यक्रम के अंत में मंत्रीगणों और संत समाज ने मिलकर दो मिनट का मौन रख दिवंगत आत्माओं को नमन किया।श्रद्धांजलि सभा का संदेश स्पष्ट था,भोपाल गैस त्रासदी सिर्फ अतीत नहीं, बल्कि एक सीख है कि मानव जीवन सर्वोपरि है और इसकी सुरक्षा से बड़ा कोई लक्ष्य नहीं।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal