प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में मध्यप्रदेश अग्रणी, ऋण वितरण में देश में तीसरा स्थान,कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग की उपलब्धियों से शिल्पियों-बुनकरों को मिला नया संबल मंत्री दिलीप जायसवाल।

कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। योजना के अंतर्गत ऋण प्रकरणों की स्वीकृति में प्रदेश देश में चौथे तथा ऋण वितरण में तृतीय स्थान पर है। पिछले दो वर्षों में 436.34 करोड़ रुपये के 48 हजार 63 ऋण प्रकरण स्वीकृत किए गए, जबकि 378.06 करोड़ रुपये के 42 हजार 559 ऋण प्रकरणों का वितरण किया गया है। यह जानकारी उन्होंने होटल अशोका लेक व्यू में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग शिल्पियों, बुनकरों और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। हस्तशिल्प और हैण्डलूम विभाग के प्रतिष्ठित ब्रांड – मृगनयनी, विंध्या वैली, कबीरा और प्राकृत – के उत्पादों को मध्यप्रदेश पर्यटन की इकाइयों, प्रमुख धार्मिक स्थलों और लोकों में आकर्षक रूप से प्रदर्शित कर विक्रय की व्यवस्था की जा रही है, जिससे स्थानीय शिल्प को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

उन्होंने बताया कि साड़ी पहनने की गौरवशाली परंपरा को प्रोत्साहित करने के लिए इंदौर में आयोजित साड़ी वॉकथान जैसे कार्यक्रम प्रदेश के अन्य शहरों में भी आयोजित किए जाएंगे। रेशम उत्पादन गतिविधियों का विस्तार अन्य जिलों में किया जाएगा तथा निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रदेश के विशिष्ट उत्पादों के लिए जीआई टैग प्राप्त करने संबंधी जानकारी का संकलन कर प्रक्रिया को और गति दी जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय में अतिथियों को भेंट किए जाने वाले हेरिटेज महेश्वरी स्टॉल के लिए मध्यप्रदेश का चयन प्रदेश के शिल्प कौशल की पहचान को दर्शाता है। गोंड पेंटिंग और बेलमेटल से सुसज्जित इन स्टॉल की मांग विदेशी दूतावासों से भी प्राप्त हुई है।

राज्यमंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा 2 लाख 16 हजार 13 हितग्राहियों को कौशल विकास प्रशिक्षण, 85 हजार 536 को टूल-किट तथा 2 लाख 45 हजार 513 को ई-वाउचर वितरित किए गए हैं। हाथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास निगम द्वारा 4207.15 लाख रुपये तथा खादी बोर्ड द्वारा 2311.89 लाख रुपये का विक्रय एम्पोरियम और प्रदर्शनियों के माध्यम से किया गया, जिससे शिल्पियों को सीधा बाजार उपलब्ध हुआ।

उन्होंने कहा कि डिण्डोरी के रॉट आयरन, उज्जैन के बटिक प्रिंट, ग्वालियर के कालीन शिल्प, बालाघाट की बारासिवनी साड़ी और जबलपुर के पत्थर शिल्प को जीआई टैग मिल चुका है, जबकि सीहोर के लकड़ी के खिलौने और नीमच के नांदना प्रिंट की प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। भारत सरकार से 181 लाख रुपये की सहायता से 32 मेलों व प्रदर्शनियों का आयोजन कर 16 हजार 780 शिल्पियों को विपणन अवसर उपलब्ध कराए गए। इंदौर में आयोजित साड़ी वॉकथान में 27 हजार महिलाओं की भागीदारी से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। शासकीय वस्त्र प्रदाय योजना, खादी उत्पादन, रेशम एवं कोकून उत्पादन, सिल्कटेक पार्क, ईको-टूरिज्म और कोकून मंडी जैसी पहलों से हजारों बुनकरों, किसानों और कारीगरों को रोजगार और आर्थिक मजबूती मिली है।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal