दुग्ध संकलन से आय वृद्धि तक समन्वित रणनीति, मोहन सरकार के नवाचारों से पशुपालन बना ग्रामीण समृद्धि की रीढ़,सुनियोजित रणनीति अपनाते हुए किये जा रहे हैं नवाचार,गौवंश के अवैध परिवहन पर वाहन किये जायेंगे राजसात,पशुओं की नस्ल सुधार के लिए संचालित है हिरण्यगर्भा अभियान।

पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने, पशुपालकों की आय बढ़ाने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित रणनीति के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य पशुपालन को केवल सहायक गतिविधि नहीं, बल्कि आजीविका का मजबूत आधार बनाना है। शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभा हॉल में पशुपालन एवं डेयरी विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों और आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की जानकारी साझा करते हुए श्री पटेल ने बताया कि बीते दो वर्षों में प्रदेश ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के पथ पर उल्लेखनीय प्रगति की है। शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प पूरी दृढ़ता से निभाया गया है।

गौसंवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में 2500 से अधिक गौशालाओं में 4.75 लाख से अधिक निराश्रित गौवंश को आश्रय दिया गया है। गौशालाओं के लिए अनुदान राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन प्रति गौवंश की गई है। इसके साथ ही गौशालाओं का बजट 250 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 505 करोड़ रुपये किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शिता से ‘स्वावलंबी गौशाला (कामधेनु निवास) नीति–2025’ लागू की गई है, जिससे गौशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी। साथ ही गौवंश के अवैध परिवहन पर सख्ती बरतते हुए ऐसे मामलों में वाहनों को राजसात करने की कार्रवाई की जाएगी।

दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की राष्ट्रीय भागीदारी 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने के लक्ष्य से “डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना” प्रारंभ की गई है। इसके अंतर्गत बड़े पैमाने पर दुधारू पशुओं की इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को वर्ष 2024-25 से पूरे प्रदेश में लागू कर पशुपालकों को दो दुधारू भैंस उपलब्ध कराई जा रही हैं। सहकारिता के माध्यम से दुग्ध संकलन और प्रसंस्करण को सशक्त करने के लिए सांची ब्रांड के उन्नयन हेतु राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ सहकार्यता अनुबंध किया गया है। अगले तीन वर्षों में औसत दुग्ध संकलन 33 लाख लीटर प्रतिदिन से अधिक करने, 15 हजार से अधिक ग्रामों को सहकारी नेटवर्क से जोड़ने और 470 हजार सदस्यों तक विस्तार का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 4000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।

पशुओं की नस्ल सुधार के लिए “हिरण्यगर्भा अभियान” संचालित किया जा रहा है, जिसमें सेक्स सॉर्टेड सीमन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं दुग्ध संपर्क समृद्धि अभियान और “क्षीरधारा ग्राम योजना” के माध्यम से उन्नत पशुपालन, पशु स्वास्थ्य, पोषण और मूल्य संवर्धन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। आगामी तीन वर्षों में 18 हजार ग्राम पंचायतों को क्षीरधारा ग्राम, 50 स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना तथा उत्कृष्ट पशुपालकों और कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने का लक्ष्य है। मंत्री पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बहुआयामी दूरदृष्टि के साथ मोहन सरकार लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है और प्रदेश को दुग्ध उत्पादन, संकलन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal