भोपाल 29दिसम्बर/मंत्री पवार ने पत्रकारों को दी विकास एवं सेवा के 2 वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी
“दो साल में बदली मत्स्य क्षेत्र की तस्वीर: मछुआरों की आय, रोजगार और उत्पादन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी”,“मत्स्य पालन केवल आजीविका नहीं, सामाजिक-आर्थिक उत्थान का मजबूत आधार” मंत्री नारायण सिंह पवार।
मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने सोमवार को जनसंपर्क विभाग के सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियां साझा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने मत्स्य क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन किया है। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्षों में मत्स्य उत्पादन, रोजगार सृजन, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और मछुआ समुदाय की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे प्रदेश ने नीली क्रांति की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं।
राज्यमंत्री पंवार ने बताया कि मध्यप्रदेश में नदियों, जलाशयों और तालाबों के माध्यम से लगभग 4.42 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र उपलब्ध है, जो मत्स्य विकास के लिए अत्यंत अनुकूल है। उन्होंने कहा कि राज्य में मत्स्य पालन अब केवल आजीविका का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह मछुआ समुदाय के सामाजिक-आर्थिक उत्थान का मजबूत आधार बन चुका है। सरकार की नीतियों और योजनाओं के कारण मत्स्य क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने वाला प्रमुख माध्यम बनकर उभरा है।उन्होंने बताया कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 में मत्स्य उत्पादन में सतत वृद्धि हुई है। आधुनिक तकनीकों जैसे केज कल्चर, बायोफ्लॉक और आरएएस (RAS) को प्रोत्साहित कर उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ाया गया है। वर्ष 2022-23 में जहां मत्स्य उत्पादन 3.41 लाख टन था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर लगभग 4.45 लाख टन तक पहुंच गया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश तेजी से नीली क्रांति की ओर अग्रसर हुआ है। वर्ष 2024-25 में PMMSY के अंतर्गत 122.5 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य स्वीकृत किए गए, जिससे हजारों मछुआ परिवारों को नाव, जाल, आइस बॉक्स, मोटरसाइकिल और कोल्ड-चेन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
मछुआरों की समृद्धि पर विशेष फोकस,राज्यमंत्री पंवार ने कहा कि बीते दो वर्षों में मछुआ समुदाय के जीवन में सकारात्मक और ठोस बदलाव देखने को मिले हैं। वर्ष 2024-25 में 556 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं का लाभ मछुआ परिवारों को दिया गया। मत्स्य पार्लर, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, विपणन और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं से मछुआरों को बेहतर बाजार और उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है। इन योजनाओं के चलते प्रदेश में हजारों नए रोजगार सृजित हुए हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
आधुनिक और तकनीकी मत्स्य पालन की ओर कदम,मंत्री पंवार ने कहा कि केज फिश फार्मिंग, बायोफ्लॉक और आरएएस जैसी आधुनिक प्रणालियों को अपनाकर प्रदेश तकनीकी मत्स्य पालन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे कम जल क्षेत्र में अधिक उत्पादन संभव हुआ है और युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर मिले हैं। उन्होंने बताया कि इंटीग्रेटेड एक्वापार्क, रिसर्च सेंटर, टनल एक्वेरियम, रिसर्च एवं इनक्यूबेशन यूनिट, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और एम्यूजमेंट जोन जैसे नवाचार किए जा रहे हैं, जिससे पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। मंत्री पंवार ने कहा कि सरकार का लक्ष्य मत्स्य क्षेत्र को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए इसे रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनाना है। बीते दो वर्षों में आए सकारात्मक बदलावों ने मध्यप्रदेश को मत्स्य विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में स्थापित कर दिया है।

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