अनुसूचित जाति वर्ग के सशक्तिकरण की नई इबारत लिख रहा मध्यप्रदेश सरकार, छात्रवृत्ति से शिक्षा को मजबूती,स्वरोजगार से आर्थिक सशक्तिकरण,शौर्य संकल्प से युवाओं को नई दिशा।

अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के समग्र कल्याण के लिए शिक्षा, रोजगार, अधोसंरचना विकास और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। राज्य सरकार ऐतिहासिक असमानताओं से उत्पन्न समस्याओं की रोकथाम और उनके त्वरित निराकरण के लिए भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रदेश की लगभग 15.6 प्रतिशत आबादी, यानी 1 करोड़ 13 लाख नागरिक अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित हैं, जिनकी उन्नति और सम्मानजनक जीवन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मंत्री चौहान अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण देने के लिए प्रदेश में 1913 छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 95,317 सीटें उपलब्ध हैं। पहले जहां इन छात्रावासों की उपयोगिता 80 प्रतिशत से कम थी, वहीं अब 90 प्रतिशत से अधिक सीटें भरी जा चुकी हैं। सरकार ने निकट भविष्य में 100 प्रतिशत सीट उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया है।छात्रावास अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए 326 भवन-विहीन छात्रावासों में से 63 के लिए नए भवन स्वीकृत किए गए, जिनमें 33 का निर्माण पूर्ण हो चुका है और शेष पर कार्य प्रगति पर है। आगामी तीन वर्षों में सभी भवन-विहीन छात्रावासों का निर्माण पूर्ण किया जाएगा। साथ ही सभी छात्रावासों को वाई-फाई, ई-लाइब्रेरी, उन्नत रसोई और सोलर सिस्टम जैसी सुविधाओं से युक्त “आदर्श छात्रावास” के रूप में विकसित किया जाएगा।

शिक्षा को आर्थिक बाधाओं से मुक्त करने के उद्देश्य से कक्षा 1 से लेकर उच्च शिक्षा तक छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित की जा रही हैं। राज्य सरकार द्वारा 8 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा तक के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जा रही है, जबकि शासकीय संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए आय सीमा का बंधन समाप्त कर दिया गया है। पिछले दो वर्षों में 49.47 लाख विद्यार्थियों को 2224 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी और एनएलआईयू जैसे राष्ट्रीय संस्थानों तथा विदेश अध्ययन के लिए भी विशेष छात्रवृत्ति से मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन मिला है।विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के तहत अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा का अवसर प्रदान किया जा रहा है, जिसमें प्रति विद्यार्थी दो वर्षों में लगभग 90 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। इसके साथ ही घर से बाहर पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए आवास सहायता योजना से हजारों छात्रों को सीधा लाभ मिला है।

स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण को गति दी जा रही है। संत रविदास स्वरोजगार योजना और डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना के तहत पिछले दो वर्षों में 10 हजार से अधिक युवाओं को 164 करोड़ रुपये से अधिक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया है। आगामी तीन वर्षों में 21 हजार से अधिक युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण सुविधा दी जाएगी।

सामाजिक न्याय की दिशा में अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालयों और थानों की स्थापना की गई है। अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के माध्यम से सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिला है।आगामी कार्ययोजना के अंतर्गत सेना, पुलिस और पैरामिलिट्री भर्ती के लिए “शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना” प्रारंभ की जाएगी, जिससे प्रतिवर्ष 3000 युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा। साथ ही सभी योजनाओं के ऑनलाइन संचालन के लिए एकीकृत विभागीय पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी हो सकेगा।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal