देवी स्वरूप बेटियों के सम्मान, शिक्षा और संस्कार का संकल्प,बिटिया पिता के लिए परी, समाज के लिए संस्कारों की धरोहर,संस्कारों से सशक्त नारी का निर्माण।

राष्ट्रीय बालिका दिवस–2026 के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश सहित देशभर की सभी देवी स्वरूप बेटियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “बेटा भाग्य से होता है, लेकिन बेटी सौभाग्य से होती है। बेटियाँ केवल परिवार की शान नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र की आत्मा होती हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि बालिकाएँ न केवल परिवार का गौरव हैं, बल्कि वे राष्ट्र की प्रगति, समृद्धि और संवेदनशील भविष्य की वाहक भी हैं। उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सशक्तिकरण से ही समाज का सर्वांगीण विकास संभव है।

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “बेटियाँ हमारी संस्कृति, संवेदना और भविष्य की आधारशिला हैं। जब उन्हें समान अवसर, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है, तो वे समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने का सामर्थ्य रखती हैं।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश सरकार हर बेटी को सशक्त, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने के लिए पूर्णतः संकल्पित है, ताकि प्रदेश की हर बिटिया अपने सपनों को निडर होकर साकार कर सके।

बिटिया—पिता के लिए परी, समाज के लिए संस्कारों की धरोहर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह संदेश केवल एक शासक के रूप में नहीं, बल्कि एक पिता की भावनाओं के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि “एक पिता के लिए उसकी बिटिया सचमुच एक परी होती है। उसके जन्म से घर में केवल खुशियाँ ही नहीं आतीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य और अधिक पवित्र हो जाता है।”

उन्होंने कहा कि पिता की आँखों में बिटिया के लिए केवल स्नेह नहीं, बल्कि सुरक्षा, जिम्मेदारी और उसके उज्ज्वल भविष्य के सपने भी बसे होते हैं। लेकिन यह प्रेम तभी सार्थक होता है, जब उसके साथ संस्कारों का बीजारोपण किया जाए।

मुख्यमंत्री ने भावुक शब्दों में कहा—“मैं एक मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ एक बिटिया का पिता भी हूँ। इस दोहरी भूमिका ने मुझे सिखाया है कि प्रेम केवल लाड़-प्यार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वह बिटिया के चरित्र, सोच और आत्मबल को मजबूत करने वाला होना चाहिए।”

संस्कारों से सशक्त नारी का निर्माण

डॉ. यादव ने प्रदेश के हर पिता से आत्मा से निकली अपील करते हुए कहा कि अपनी बिटिया को केवल प्यार ही नहीं, बल्कि बचपन से अच्छे संस्कार दें। संस्कार सख्ती नहीं, बल्कि सही दिशा देने का नाम है। बिटिया को आत्मनिर्भर बनना सिखाएँ, सत्य और साहस का मूल्य समझाएँ, दूसरों के सम्मान के साथ स्वयं के स्वाभिमान को पहचानना सिखाएँ।

उन्होंने कहा कि जब पिता अपनी बिटिया के सामने एक आदर्श बनकर खड़ा होता है, तो वही आदर्श उसके जीवन की नींव बन जाता है। आज का समय केवल शिक्षा देने का नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों को रोपित करने का है। यदि तकनीक और भौतिकता की दौड़ में संस्कार छूट गए, तो समाज खोखला हो जाएगा।

संकल्प—बेटियों से उज्ज्वल भविष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक संस्कारी बिटिया ही आगे चलकर सशक्त नारी, जिम्मेदार नागरिक और संतुलित परिवार का निर्माण करती है। पिता का दायित्व है कि वह बिटिया को यह विश्वास दे कि वह सुरक्षित है, सम्मानित है और समर्थ है। उसे निर्णय लेना, अपनी बात रखना और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस सिखाना ही सच्चा पालन-पोषण है।

अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की जनता से आह्वान किया—
“आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि बेटियों के सम्मान, शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहेंगे। हमारी बेटियाँ हमारा मान, हमारी संस्कृति और हमारे उज्ज्वल भविष्य की पहचान हैं।”

"मध्य प्रदेश के मुखिया एवं एक बेटी के पिता की कलम से"

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal