मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से जश्ने उर्दू–2026 का भव्य आयोजन 30 जनवरी से 2 फ़रवरी 2026 तक गोलघर, शाहजहाँनाबाद, भोपाल में किया जा रहा है। यह आयोजन केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय बहुलतावादी संस्कृति की उस जीवंत परंपरा का उत्सव है, जिसमें भाषा, साहित्य और कला राष्ट्रीय चेतना के सशक्त माध्यम के रूप में सामने आते हैं।

मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी के निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने बताया कि इस वर्ष जश्ने उर्दू की केंद्रीय अवधारणा “आत्मबोध से विश्वबोध” निर्धारित की गई है। यह विचार वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक है, जहाँ अपनी सांस्कृतिक जड़ों की पहचान के साथ-साथ विश्व संवाद में सक्रिय सहभागिता की आवश्यकता है। उर्दू साहित्य सदैव आत्मचिंतन और वैश्विक दृष्टि के संतुलन का सशक्त उदाहरण रहा है और यही संतुलन इस आयोजन के केंद्र में रहेगा।

डॉ. मेहदी के अनुसार जश्ने उर्दू–2026 के अंतर्गत उर्दू भाषा, साहित्य, संस्कृति और कला के विविध आयामों पर गंभीर एवं सार्थक विमर्श होगा। शिक्षा, संस्कृति, स्त्री विमर्श, सामाजिक समरसता, सह-अस्तित्व, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रबोध जैसे विषयों पर संगोष्ठियाँ आयोजित की जाएँगी। यह आयोजन इस तथ्य को रेखांकित करता है कि उर्दू साहित्य किसी एक समुदाय तक सीमित न होकर भारतीय समाज की साझा संवेदना और सामूहिक चेतना का प्रतिनिधित्व करता है।

चार दिवसीय इस उत्सव में मुशायरे, बैतबाज़ी, क़व्वाली, संगीत संध्या, नाट्य प्रस्तुतियाँ, हास्य-व्यंग्य, उर्दू की फ़िल्मी यात्रा, व्याख्यान, संवाद सत्र, कार्यशालाएँ, सेमिनार, बेबाकी, ओपन माइक, कैलीग्राफी, प्रदर्शनी एवं पुस्तक मेला जैसे आकर्षक कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। देश के प्रतिष्ठित शायरों, लेखकों, साहित्यकारों, विद्वानों और कलाकारों की सहभागिता इस आयोजन को और अधिक गरिमामय बनाएगी।

आयोजकों का मानना है कि साहित्य केवल पाठ्य विषय नहीं, बल्कि लोकजीवन से जुड़ा हुआ जीवंत अनुभव है। जश्ने उर्दू–2026 के माध्यम से आमजन को यह संदेश दिया जाएगा कि भाषा और साहित्य समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ बनाते हैं। उर्दू भाषा की गंगा-जमुनी तहज़ीब, उसकी सौंदर्यपूर्ण अभिव्यक्ति और सामाजिक सरोकार इस उत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचेगी।

डॉ. नुसरत मेहदी ने कहा कि मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी निरंतर उर्दू भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है। जश्ने उर्दू–2026 इसी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है, जो विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्यकारों और आम नागरिकों को वैचारिक रूप से समृद्ध करेगा। यह आयोजन यह भी स्पष्ट करेगा कि भाषाएँ दीवार नहीं, सेतु बनाती हैं और साहित्य राष्ट्र की आत्मा को अधिक मानवीय और संवेदनशील स्वरूप प्रदान करता है।

उर्दू अकादमी ने भोपाल सहित प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव में सहभागी बनें और उर्दू की समृद्ध परंपरा से रूबरू हों। जश्ने उर्दू–2026 निश्चय ही मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त करेगा।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal