भोपाल 29जनवरी/मध्यप्रदेश विधानसभा बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च,सरकार पेश करेगी तीसरा अनुपूरक बजट
मोहन सरकार 5 हजार करोड़ से अधिक का तीसरा अनुपूरक बजट करेगी पेश।
मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ होकर 6 मार्च 2026 तक चलेगा। इस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तीसरा अनुपूरक बजट विधानसभा के पटल पर रखेगी। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस अनुपूरक बजट की राशि 5 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है, हालांकि इसका आकार पिछले वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत छोटा रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्राथमिकता दी है। इसी दृष्टिकोण के तहत अनुपूरक बजट को सीमित रखते हुए केवल आवश्यक और पूर्व स्वीकृत प्रस्तावों को ही इसमें शामिल किया जाएगा।
अनुपूरक बजट को लेकर गहन मंथन जारी:वित्त विभाग द्वारा सभी विभागों से तीसरे अनुपूरक बजट के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए जा चुके हैं। प्राप्त प्रस्तावों पर वित्त विभाग गहन विचार-विमर्श कर रहा है और शीघ्र ही अनुपूरक बजट की अंतिम राशि को अंतिम रूप दिया जाएगा। वित्त अधिकारियों के अनुसार, तीसरे अनुपूरक बजट में केवल वही प्रस्ताव शामिल होंगे, जिनके लिए पहले ही राज्य आकस्मिक निधि से अग्रिम स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके साथ ही ऐसे प्रस्ताव भी सम्मिलित किए जा सकते हैं, जिनमें केंद्र सरकार या किसी अन्य वित्तीय एजेंसी से सहायता स्वीकृत हो चुकी हो, लेकिन जिन्हें मौजूदा बजट प्रावधानों से पूरा करना संभव नहीं है। इसके अतिरिक्त, विशेष केंद्रीय सहायता योजनाओं के अंतर्गत भारत सरकार को भेजे गए या भेजे जाने वाले प्रस्ताव, जिनके लिए अलग से बजट मद खोलना आवश्यक है, उन्हें भी इस अनुपूरक बजट में स्थान दिया जा सकता है। वहीं, ऐसे नए मदों को शामिल नहीं किया जाएगा, जिनसे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़े।
‘जीरो बेस्ड बजट’ बना सीमित अनुपूरक बजट की वजह:वित्त विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तीसरे अनुपूरक बजट का आकार छोटा रहने का सबसे बड़ा कारण वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपनाई गई ‘जीरो बेस्ड बजट’ प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत बजट अनुमानों की शुरुआत शून्य से की गई और पूर्व वर्षों के व्यय को आधार नहीं बनाया गया। सभी विभागों की चल रही योजनाओं और प्रस्तावित कार्यक्रमों का बारीकी से मूल्यांकन कर वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप ही बजट प्रावधान किए गए। इसी कारण अधिकांश विभागों ने अनुपूरक बजट में अतिरिक्त राशि की मांग नहीं की, जिससे सरकार को वित्तीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिली है।
वित्तीय अनुशासन की दिशा में मोहन सरकार के कदम:मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से ही वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और विकासोन्मुख बजट को अपनी प्राथमिकता बनाया है। सीमित लेकिन उद्देश्यपूर्ण अनुपूरक बजट इस बात का संकेत है कि सरकार अनावश्यक खर्च से बचते हुए जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।
अब तक पेश किए गए अनुपूरक बजट:मोहन सरकार द्वारा अब तक पेश किए गए अनुपूरक बजट इस प्रकार रहे हैं—
दिसंबर 2024: वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए ₹22,460 करोड़ का प्रथम अनुपूरक बजट
मार्च 2025: वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए ₹19,206 करोड़ का द्वितीय अनुपूरक बजट
जुलाई 2025: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹2,356 करोड़ का प्रथम अनुपूरक बजट
दिसंबर 2025: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹13,476 करोड़ का द्वितीय अनुपूरक बजट
विकास और संतुलन पर फोकस:आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत होने वाला तीसरा अनुपूरक बजट राज्य की विकासात्मक जरूरतों, केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय संतुलन के बीच संतुलन साधने का प्रयास होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार का स्पष्ट संदेश है कि विकास भी हो और वित्तीय अनुशासन भी बना रहे—इसी सोच के साथ यह बजट सत्र और अनुपूरक बजट राज्य के लिए अहम साबित होने वाला है।

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