“दलहन आत्मनिर्भरता की ओर ऐतिहासिक कदम, 2030 तक 350 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य, मध्यप्रदेश बनेगा देश का अग्रणी मॉडल”।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में आयोजित दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन के पश्चात मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की उपजाऊ धरती, समृद्ध जल संसाधन और अनुकूल जलवायु प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (ICARDA) जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक संस्थान का सशक्त होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। भारत में अन्न केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और संस्कार का आधार है—“अन्न देवो भव:” हमारी कृषि परंपरा का मूल मंत्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ किसानों के साथ खड़ी सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन का उद्देश्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना, आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। मिशन के अंतर्गत किसानों को बेहतर गुणवत्ता के बीज, आधुनिक भंडारण सुविधाएं और सुनिश्चित विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता देश है तथा दलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है, इसलिए इस मिशन का सर्वाधिक लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा।

सम्मेलन का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर ICARDA सीहोर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र एवं अत्याधुनिक प्लांट टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इकार्डा का यह नवीन परिसर प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए नई आशाओं और संभावनाओं का द्वार खोलेगा। यह केंद्र वैज्ञानिक खेती, उन्नत तकनीक और वैश्विक कृषि अनुभव को किसानों से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने सिंचाई विस्तार और जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि इकार्डा द्वारा विकसित वैज्ञानिक मॉडल प्रदेश की कृषि योजनाओं को मजबूत आधार प्रदान करेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्रालय और इकार्डा का यह संयुक्त प्रयास मध्यप्रदेश को टिकाऊ, समृद्ध और आधुनिक कृषि का न केवल राष्ट्रीय बल्कि वैश्विक मॉडल बना सकता है। उन्होंने कहा कि सीहोर में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों, संभावनाओं और भविष्य की दिशा पर गहन विमर्श का सशक्त मंच बनेगा तथा नीति निर्माण और अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत का फूड बॉस्केट है। भारतीय संस्कृति में अन्न देवता के माध्यम से समाज पल्लवित होता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विकास और कल्याण के चार स्तंभ—गरीब, किसान, युवा और नारी—निर्धारित किए हैं। उन्होंने कहा कि भावांतर भुगतान योजना के माध्यम से सोयाबीन किसानों को 1500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में पहुंचाई गई है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 44 लाख हेक्टेयर बढ़ा है और केन-बेतवा तथा पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजनाओं से इसे 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य है।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश आज भी दलहन उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। उन्होंने बताया कि दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत बीज ग्राम, बीज हब, दाल क्लस्टर और दाल मिलों की स्थापना की जाएगी। किसानों को एक हेक्टेयर में दलहन उत्पादन पर 10 हजार रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा और दाल मिल लगाने पर 25 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। केंद्र सरकार तुअर, उड़द, चना और मसूर की शत-प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को इस मिशन के अंतर्गत 354 करोड़ रुपये की बजट सहायता मिलेगी। कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, केंद्रीय राज्यमंत्री द्वय श्री रामनाथ ठाकुर एवं श्री भागीरथ चौधरी, राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, सीहोर जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, ICARDA के महानिदेशक श्री अली अबुर साबा, ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, केंद्रीय कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान एवं बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित रहे। सम्मेलन में दलहन मिशन पोर्टल का शुभारंभ, प्रकाशनों का विमोचन, कृषि प्रदर्शनी और पौधरोपण भी किया गया।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal