तीन मंत्रियों का सदन में घेराव और बहिष्कार।

मध्य प्रदेश में 16 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र के साथ सियासत का पारा चढ़ने जा रहा है। कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वह सरकार के तीन प्रमुख मंत्रियों—उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह—को सदन में घेरने के साथ उनका बहिष्कार भी करेगी। कांग्रेस का आरोप है कि इन मंत्रियों से जुड़े गंभीर मामलों में जवाबदेही तय नहीं की गई और सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है।
जहरीले कफ सिरप का मुद्दा बनेगा केंद्र

कांग्रेस ने छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा में कथित रूप से जहरीले कफ सिरप “कोल्ड्रिफ” के सेवन से बच्चों की मौत का मामला सत्र में प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया है। पार्टी का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में गंभीर लापरवाही हुई, लेकिन अब तक जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कांग्रेस इसे “प्रशासनिक असंवेदनशीलता” और “जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़” बता रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य विभाग देख रहे उप मुख्यमंत्री की नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए थी, परंतु सरकार ने चुप्पी साध रखी है। कांग्रेस इस मुद्दे को बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता से जोड़कर उठाने की तैयारी में है।

भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का मामला: इसी तरह इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से 35 लोगों की मौत का मुद्दा भी सदन में गूंजेगा। कांग्रेस का कहना है कि नगरीय विकास विभाग की जिम्मेदारी तय किए बिना सरकार विकास के दावे कर रही है। पार्टी का आरोप है कि शहरी ढांचे की खामियों और निगरानी की कमी ने निर्दोष लोगों की जान ली, फिर भी जवाबदेही से बचने की कोशिश की जा रही है।

कर्नल सोफिया कुरैशी टिप्पणी विवाद: सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर भी कांग्रेस सरकार को कठघरे में खड़ा करेगी। कांग्रेस का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को संवैधानिक मर्यादा का पालन करना चाहिए और इस प्रकरण में स्पष्ट कार्रवाई न होना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

विधायक दल की रणनीति बैठक 16 फरवरी को भोपाल में कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई है, जिसकी अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार करेंगे। इस बैठक में बजट सत्र के दौरान सरकार को घेरने की विस्तृत रणनीति तय की जाएगी। कांग्रेस कानून-व्यवस्था, बढ़ते कर्ज, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग पर अत्याचार, किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों को आक्रामक रूप से उठाने की तैयारी में है।

बजट सत्र बनेगा जवाबदेही का मंच: जहां सरकार बजट को विकासोन्मुखी और जनहितैषी बताने की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि यह सत्र “जवाबदेही और पारदर्शिता की परीक्षा” होगा। पार्टी का आरोप है कि सरकार आंकड़ों और घोषणाओं के सहारे वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह केवल विरोध के लिए विरोध नहीं करेगी, बल्कि जनहित से जुड़े ठोस मुद्दों पर सरकार से सीधा जवाब मांगेगी। तीन मंत्रियों के बहिष्कार का फैसला इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। ऐसे में 16 फरवरी से शुरू हो रहा बजट सत्र सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे टकराव का गवाह बन सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सरकार इन आरोपों पर स्पष्ट जवाब नहीं देती, तो सदन में हंगामे और स्थगन की स्थिति बन सकती है। फिलहाल, प्रदेश की राजनीति का केंद्र अब विधानसभा का यह बजट सत्र बन चुका है, जहां सवालों की बौछार और जवाबदेही की मांग के बीच सियासी तापमान लगातार बढ़ने के आसार हैं।

 मध्य प्रदेश कांग्रेस

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal