1 घंटा 10 मिनट चली चर्चा, मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने रखे आंकड़े और कार्रवाई का खाका।

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के दौरान राजधानी भोपाल में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठा। कांग्रेस विधायक आतिफ अखिल ने इस गंभीर जनसमस्या को प्रमुखता से रखते हुए कहा कि भोपाल जिले में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से आमजन भय और असुरक्षा के वातावरण में जीने को मजबूर हैं। इस विषय पर सदन में लगभग 1 घंटा 10 मिनट तक विस्तृत चर्चा हुई। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह मुद्दा राजनीतिक सीमाओं से परे जनहित से जुड़ा है।

विधायक आतिफ अखिल ने उठाए गंभीर प्रश्न ध्यान आकर्षण के माध्यम से विधायक आतिफ अखिल ने कहा कि राजधानी में प्रतिदिन 40 से 50 तक डॉग बाइट की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि शासन और जिला प्रशासन द्वारा नसबंदी एवं वैक्सीनेशन पर प्रतिवर्ष लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद आवारा कुत्तों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं आ रही है। उन्होंने हाल ही में डॉग बाइट के बाद एक युवक की मृत्यु का मामला भी उठाया और एंटी रैबीज इंजेक्शन की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की। विधायक ने सवाल किया कि जब हर वर्ष करोड़ों रुपये व्यय हो रहे हैं तो जमीनी स्तर पर परिणाम क्यों दिखाई नहीं दे रहे?

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का जवाब आंकड़ों के साथ रखा पक्ष नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ध्यान आकर्षण पर जवाब देते हुए कहा कि आवारा कुत्ते एक सामुदायिक जीव हैं और बदलते मौसम, प्रजनन काल एवं अन्य कारणों से उनके व्यवहार में आक्रामकता बढ़ जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम भोपाल और प्रदेश के अन्य नगरीय निकाय इस समस्या से निपटने के लिए सतत कार्रवाई कर रहे हैं। मंत्री ने बताया कि भोपाल नगर निगम में डॉग स्क्वॉड टीम के माध्यम से आक्रामक, घायल एवं बीमार कुत्तों को पकड़कर आश्रय स्थल में रखा जाता है। वर्ष 2023 में एक नसबंदी केंद्र से बढ़ाकर तीन केंद्र किए गए हैं। नसबंदी और टीकाकरण कार्य ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से अधिकृत एजेंसी द्वारा किया जा रहा है तथा कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई है।

नसबंदी और टीकाकरण के आंकड़े: मंत्री ने सदन में विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2022-23 में 9,291 आवारा कुत्तों की नसबंदी की गई। वर्ष 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 18,497 हुई। वर्ष 2024-25 में 21,452 और 2025-26 (31 जनवरी 2026 तक) 21,432 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है।

इसी प्रकार एंटी रैबीज टीकाकरण के अंतर्गत:
2022-23 में 9,352,
2023-24 में 20,649,
2024-25 में 26,427,
तथा 2025-26 में 26,941 कुत्तों का टीकाकरण किया गया है।

मंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार भोपाल में एंटी रैबीज वैक्सीन के 5,023 इंजेक्शन उपलब्ध हैं, अतः यह कहना सही नहीं है कि इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। प्रदेश स्तर पर की जा रही कार्रवाई मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश के 16 नगरीय निकायों में 19 श्वान नसबंदी केंद्र संचालित हैं। वर्ष 2020 से 2025 के बीच 4,25,375 आवारा कुत्तों की नसबंदी और 5,23,091 कुत्तों का एंटी रैबीज टीकाकरण किया गया है। उन्होंने बताया कि 413 नगरीय निकायों में पशु जन्म नियंत्रण एवं निगरानी समितियों का गठन किया गया है। साथ ही जिला एवं संभाग स्तर पर मॉनिटरिंग समितियां गठित कर नियमित समीक्षा की जा रही है।

भोपाल में पूर्व संचालित तीन केंद्रों के अतिरिक्त दो नए केंद्र प्रारंभ किए गए हैं। इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में भी नए केंद्र प्रस्तावित या संचालित किए जा रहे हैं। जनजागरूकता और दीर्घकालिक समाधान मंत्री ने कहा कि केवल पकड़ने या हटाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। पशु जन्म नियंत्रण नियमों के तहत नसबंदी और टीकाकरण ही प्रभावी उपाय है। नगर निगम द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं तथा स्कूलों में विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से डॉग बाइट से बचाव और प्राथमिक उपचार की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नगर निगम द्वारा पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी एवं टीकाकरण के बाद उनके मूल स्थान पर छोड़ा जाता है, जो विधिक प्रावधानों के अनुरूप है।
सदन में सभी पक्षों की चिंता

चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बढ़ती घटनाओं का उल्लेख किया और ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विषय की गंभीरता को देखते हुए सभी सदस्यों को विस्तार से अपनी बात रखने का अवसर दिया। सदन में हुई विस्तृत चर्चा से स्पष्ट है कि भोपाल सहित प्रदेश में आवारा कुत्तों की समस्या जनस्वास्थ्य और जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है। जहां विपक्ष ने प्रशासनिक विफलता और संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर प्रश्न उठाए, वहीं सरकार ने आंकड़ों और योजनाओं के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धता जताई। अब देखना यह होगा कि घोषित योजनाएं और बढ़ाए गए संसाधन जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी सिद्ध होते हैं और आमजन को इस समस्या से कितनी राहत मिलती है।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal