भोपाल23फरवरी/मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना में बी.पी.एल. कार्ड की अनिवार्यता पर विधानसभा में तीखी बहस
डॉ. सतीश सिकरवार के सवालों पर मंत्री नारायण सिंह कुशवाह का जवाब—2006 से लागू योजना में 1.94 लाख से अधिक विवाह संपन्न।
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ग्वालियर पूर्व से कांग्रेस विधायक डॉ. सतीश सिकरवार ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग से जुड़ी महत्त्वपूर्ण योजना—“मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना”—को लेकर सदन में कई गंभीर प्रश्न उठाए। उन्होंने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह से योजना की शुरुआत, पात्रता शर्तों, बी.पी.एल. कार्ड की अनिवार्यता तथा अब तक हुए विवाहों की संख्या संबंधी विस्तृत जानकारी मांगी।
2006 से लागू है योजना: मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया कि प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना वर्ष 2006 से लागू है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहयोग प्रदान करना है, ताकि निर्धन परिवारों पर विवाह का आर्थिक बोझ कम किया जा सके। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा जारी आदेशों की जानकारी पुस्तकालाय में रखे परिशिष्ट “अ” के अनुसार उपलब्ध है।
वर्षवार संशोधन और पात्रता में बदलाव: डॉ. सिकरवार ने पूछा कि योजना प्रारंभ होने के बाद किन-किन तिथियों पर पात्रता संबंधी शर्तों में संशोधन किए गए। इस पर मंत्री ने बताया कि वर्ष 2006, 2013, 2022 एवं 2025 में योजना से संबंधित आदेशों और प्रावधानों में संशोधन किए गए हैं। इन संशोधनों की जानकारी भी पुस्तकालाय में रखे परिशिष्ट “ख” के अनुसार उपलब्ध कराई गई है। विधायक ने यह भी जानना चाहा कि वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक कुल कितने विवाह इस योजना के अंतर्गत संपन्न हुए। मंत्री ने उत्तर दिया कि वर्ष 2020 से अब तक कुल 1,94,146 विवाह योजना के अंतर्गत संपन्न हुए हैं, जिसकी जानकारी परिशिष्ट “स” में दर्ज है।
बी.पी.एल. कार्ड की अनिवार्यता पर सवाल: सदन में सबसे अधिक चर्चा बी.पी.एल. कार्ड की अनिवार्यता को लेकर हुई। डॉ. सिकरवार ने पूछा कि क्या इस योजना के अंतर्गत विवाह करने हेतु कन्या के लिए बी.पी.एल. कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है? यदि हां, तो इससे संबंधित आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जाए। मंत्री ने उत्तर दिया कि हां, योजना के लाभ के लिए बी.पी.एल. की अनिवार्यता रखी गई है। परिशिष्ट “द” के अनुसार संबंधित आदेश की जानकारी उपलब्ध है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता के रूप में “कन्या तथा कन्या के अभिभावक गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हों” यह शर्त जोड़ी गई है।
क्या सीमित हो रहा है योजना का दायरा? :डॉ. सिकरवार ने आगे सवाल उठाया कि बी.पी.एल. कार्ड की अनिवार्यता से क्या योजना का लाभ निर्धारित वर्ग के कई जरूरतमंद परिवारों तक नहीं पहुंच पा रहा है? उन्होंने आशंका जताई कि यदि पात्रता शर्तें अत्यधिक कड़ी होंगी तो वास्तविक जरूरतमंद परिवार वंचित रह सकते हैं और योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। मंत्री ने उत्तर में कहा कि ऐसा नहीं है और योजना का लाभ वास्तविक पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। सरकार की मंशा है कि सहायता उन्हीं परिवारों को मिले जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में बी.पी.एल. संबंधी शर्त यथावत है और इसमें कोई परिवर्तन प्रस्तावित नहीं है। इस विषय पर शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
सदन में सामाजिक सरोकार का मुद्दा: विधानसभा में उठे इस प्रश्न ने सामाजिक सरोकारों को केंद्र में ला दिया। मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना राज्य की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक मानी जाती है। हर वर्ष हजारों गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह सामूहिक समारोहों के माध्यम से संपन्न कराया जाता है। योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता के साथ आवश्यक घरेलू सामग्री भी प्रदान की जाती है, जिससे नवदंपत्ति अपने जीवन की नई शुरुआत सम्मानपूर्वक कर सकें। डॉ. सिकरवार ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी जरूरतमंद परिवार केवल तकनीकी कारणों से वंचित न रहे। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी पात्र परिवार के पास बी.पी.एल. कार्ड नहीं है, लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, तो उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।
सरकार का पक्ष,पारदर्शिता और लक्ष्यित लाभ: मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने दोहराया कि योजना का उद्देश्य ही गरीब और वंचित वर्ग की सहायता करना है। बी.पी.एल. कार्ड को आधार मानने से पारदर्शिता बनी रहती है और लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचता है। उन्होंने बताया कि समय-समय पर शासन द्वारा योजना की समीक्षा की जाती है और आवश्यकतानुसार संशोधन भी किए जाते हैं।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व: विधानसभा में उठा यह मुद्दा राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष जहां पात्रता शर्तों में लचीलापन लाने की बात कर रहा है, वहीं सरकार पारदर्शिता और लक्षित वितरण की आवश्यकता पर जोर दे रही है। योजना के अंतर्गत 2020 से अब तक 1.94 लाख से अधिक विवाह संपन्न होना इस बात का संकेत है कि योजना का व्यापक प्रभाव है। फिर भी, बी.पी.एल. कार्ड की अनिवार्यता को लेकर उठे प्रश्नों ने भविष्य में संभावित नीतिगत विमर्श की जमीन तैयार कर दी है।
23 फरवरी 2026 के विधानसभा सत्र में उठे इस प्रश्न ने यह स्पष्ट कर दिया कि सामाजिक योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि उनकी पहुंच और प्रभाव से आंकी जाती है। मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को राहत मिली है, लेकिन पात्रता शर्तों पर निरंतर समीक्षा और संवाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। सदन में हुई यह चर्चा न केवल योजना की पारदर्शिता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जनप्रतिनिधि सामाजिक हित के मुद्दों को गंभीरता से उठा रहे हैं।

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