भोपाल 26फरवरी/विधानसभा में विधायक पटेल के सिंचाई के प्रश्न के उत्तर में मंत्री सिलावट ने दी विस्तृत जानकारी
वारासिवनी–खैरलांजी में नए स्टॉप डेम की फिलहाल नहीं स्वीकृति, 3 योजनाएं मरम्मत के लिए परीक्षणाधीन विधायक विवेक विक्की पटेल के प्रश्न पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट का सदन में जवाब।
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को वारासिवनी विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 112 से विधायक विवेक विक्की पटेल द्वारा उठाए गए सिंचाई से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने विस्तृत जवाब दिया। प्रश्न क्रमांक 1940 (तारांकित) के माध्यम से विधायक पटेल ने वारासिवनी–खैरलांजी क्षेत्र में स्टॉप डेम, तालाब निर्माण एवं जलाशयों के जीर्णोद्धार की स्वीकृतियों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी।
क्या पूछा गया था?
विधायक विवेक विक्की पटेल ने सदन में जानना चाहा कि विधानसभा क्षेत्र 112 वारासिवनी–खैरलांजी के अंतर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा कितने नए स्टॉप डेम/तालाब निर्माण या जलाशय जीर्णोद्धार की स्वीकृति शासन स्तर पर विचाराधीन है?
ऐसे कितने प्रस्तावों की साध्यता (फिजिबिलिटी) स्वीकृत हो चुकी है और उनकी प्रशासनिक स्वीकृति कब तक दी जाएगी?
विकासखंड वारासिवनी के ग्राम रमसा एवं ग्राम सिर्रा की सीमा पर बने चाप जलाशय से कितने गांवों की कृषि भूमि की सिंचाई हो रही है तथा क्या उसके जीर्णोद्धार के लिए कोई कार्ययोजना प्रस्तावित है?
मंत्री का जवाब: 3 योजनाएं परीक्षणाधीन, नए स्टॉप डेम की स्वीकृति नहीं सिंचाई मंत्री तुलसीराम सिलावट ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया कि वारासिवनी–खैरलांजी क्षेत्र में जल संसाधन विभाग की तीन योजनाओं के सुधार/मरम्मत कार्य प्रस्ताव वर्तमान में साध्यता परीक्षण हेतु परीक्षाधीन हैं। इन योजनाओं का विवरण इस प्रकार है—
बकोरा क्रमांक-1 – अनुमानित लागत 22.62 लाख रुपये
पिपलवा क्रमांक-2 – अनुमानित लागत 9.52 लाख रुपये
लालपुर लघु जलाशय – अनुमानित लागत 11.68 लाख रुपये
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन तीन प्रस्तावों के अतिरिक्त किसी भी नए स्टॉप डेम या तालाब निर्माण की साध्यता स्वीकृत नहीं की गई है। साथ ही, शासन स्तर पर किसी नई परियोजना की प्रशासनिक स्वीकृति लंबित नहीं है।उन्होंने यह भी बताया कि प्रश्न के उपखंड (ख) के संदर्भ में शेष प्रश्न लागू नहीं होते, क्योंकि वर्तमान में कोई नई परियोजना स्वीकृति की अवस्था में नहीं है।
चाप जलाशय की स्थिति: विधायक पटेल द्वारा उठाए गए तीसरे महत्वपूर्ण बिंदु—ग्राम रमसा एवं ग्राम सिर्रा की सीमा पर बने चाप जलाशय—के संबंध में मंत्री सिलावट ने जानकारी दी कि इस जलाशय से तीन गांवों की लगभग 300 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होती है। हालांकि, जलाशय की वर्तमान भौतिक स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई है, जिसके कारण फिलहाल उसके जीर्णोद्धार की स्थिति नहीं बन पाई है। मंत्री ने संकेत दिया कि तकनीकी परीक्षण और संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
क्षेत्रीय किसानों की उम्मीदें: वारासिवनी–खैरलांजी क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि आधारित है, जहां सिंचाई संसाधनों का विस्तार किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में विधायक विवेक विक्की पटेल द्वारा सदन में यह मुद्दा उठाया जाना क्षेत्रीय किसानों की अपेक्षाओं को स्वर देने वाला कदम माना जा रहा है। किसानों का कहना है कि छोटे स्टॉप डेम और तालाबों के निर्माण से वर्षा जल का संरक्षण बेहतर होगा और रबी फसल के लिए अतिरिक्त सिंचाई उपलब्ध हो सकेगी। वर्तमान में कई पुराने जलाशयों की स्थिति जर्जर होने से उनकी भंडारण क्षमता प्रभावित हो रही है।
विधायक का प्रयास: सिंचाई सुविधाओं का विस्तार विधानसभा में तारांकित प्रश्न के माध्यम से विधायक पटेल ने न केवल नए निर्माण कार्यों की स्थिति जानी, बल्कि लंबित मरम्मत कार्यों की प्रगति भी स्पष्ट करने का प्रयास किया। क्षेत्र में बढ़ती सिंचाई आवश्यकता को देखते हुए उनका यह सवाल सीधे तौर पर किसानों के हितों से जुड़ा हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधायक द्वारा सटीक आंकड़ों के साथ प्रश्न पूछे जाने से विभागीय कार्यों की पारदर्शिता बढ़ती है और क्षेत्रीय विकास योजनाओं की वास्तविक स्थिति सामने आती है।
जल संसाधन मंत्री के उत्तर से यह स्पष्ट है कि फिलहाल वारासिवनी–खैरलांजी क्षेत्र में नई परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हुई है, परंतु तीन मरम्मत प्रस्ताव परीक्षणाधीन हैं। यदि इन प्रस्तावों को तकनीकी स्वीकृति मिलती है, तो क्षेत्र के किसानों को सीमित ही सही, परंतु राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण एवं सिंचाई विस्तार के लिए लघु परियोजनाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। छोटे स्टॉप डेम और तालाब न केवल सिंचाई क्षमता बढ़ाते हैं, बल्कि भूजल स्तर को भी स्थिर रखने में सहायक होते हैं।
26 फरवरी 2026 को विधानसभा में हुए इस प्रश्नोत्तर के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि वारासिवनी–खैरलांजी क्षेत्र में फिलहाल नए स्टॉप डेम या तालाब निर्माण की कोई स्वीकृति लंबित नहीं है, लेकिन तीन मरम्मत प्रस्ताव परीक्षण की अवस्था में हैं। चाप जलाशय की वर्तमान स्थिति संतोषजनक नहीं होने के कारण उसका जीर्णोद्धार तत्काल संभव नहीं है। विधायक विवेक विक्की पटेल द्वारा उठाया गया यह मुद्दा क्षेत्र के किसानों की आवाज बनकर सामने आया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभागीय स्तर पर परीक्षणाधीन प्रस्तावों को कब स्वीकृति मिलती है और क्षेत्र को बेहतर सिंचाई सुविधाएं कब तक प्राप्त हो पाती हैं।

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