लाल निशान में बंद हुआ बाजार, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट
नई दिल्ली। भारतीय शेयर और मुद्रा बाजार में आज भारी उथल-पुथल का माहौल देखा जा रहा है। बिकवाली के दबाव के कारण जहां शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आई है, वहीं भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
बाजार में हावी रही मुनाफावसूली: सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
मुंबई: सप्ताह के कारोबारी सत्र में आज घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर की गई मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में गिरावट का रुख बना हुआ है।
शेयर बाजार का लेखा-जोखा
शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में कारोबार करते दिखे:
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सेंसेक्स: बीएसई का सेंसेक्स 361.62 अंक टूटकर 76,907.78 के स्तर पर आ गया।
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निफ्टी: एनएसई का निफ्टी 134.90 अंकों की गिरावट के साथ 23,980.60 पर पहुंच गया।
सेक्टोरल अपडेट: बाजार में सबसे ज्यादा मार बैंकिंग, रियल एस्टेट, मेटल और वित्तीय क्षेत्रों पर पड़ी है। हालांकि, आईटी और मीडिया सेक्टर में कुछ खरीदारी देखी गई, जिससे इन्हें थोड़ी राहत मिली। वहीं, फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर में सुस्ती छाई रही।
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
शेयर बाजार के साथ-साथ मुद्रा बाजार से भी नकारात्मक खबरें आ रही हैं। डॉलर की मजबूती और विदेशी फंडों की निकासी के बीच भारतीय रुपया 17 पैसे कमजोर होकर 95.40 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर जा गिरा है। रुपये की इस कमजोरी ने आयातकों और अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ा दी है।
वैश्विक बाजारों का दबाव
भारतीय बाजारों पर अंतरराष्ट्रीय संकेतों का भी गहरा असर पड़ रहा है। एशियाई बाजारों में हांगकांग का 'हैंग सेंग' 1.4% और ऑस्ट्रेलिया का 'एसएंडपी/एएसएक्स 200' 0.8% तक नीचे गिर गया है। यूरोपीय वायदा बाजारों में भी कमजोरी के संकेत मिल रहे हैं।
गिरावट के प्रमुख कारण: विशेषज्ञों का विश्लेषण
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रणनीतिकारों के अनुसार, बाजार पर इस समय कई प्रतिकूल कारक एक साथ दबाव बना रहे हैं:
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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए बड़ा झटका है।
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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.44% हो गई है। इसके चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से हाथ खींच रहे हैं।
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चुनावी उत्साह का अंत: विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया चुनावी नतीजों से मिला मनोवैज्ञानिक लाभ अब समाप्त हो चुका है और बाजार अब वास्तविक आर्थिक आंकड़ों पर ध्यान दे रहा है।

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