भोपाल 31अगस्त/विजय शाह पर मुकदमे का फैसला अभी बाकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा राज्यपाल को निर्णय लेने दें
CJI सूर्यकांत ने जांच रिपोर्ट की प्रक्रिया को किया स्पष्ट जांच रिपोर्ट को नियमों के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास जाना ही होता है,SIT की जांच पूरी, सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट,अभियोजन स्वीकृति राज्यपाल के पास लंबित, शाह की ओर से माफी को रिकॉर्ड पर लेने की मांग।
मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह से जुड़े विवादित बयान के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद फिलहाल गेंद राज्यपाल के पाले में है। मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलेगा या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अभियोजन स्वीकृति के संबंध में राज्यपाल को अपने स्तर पर निर्णय लेने दिया जाए।अदालत ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने के बजाय निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन होने देने का रुख अपनाया।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की विशेष पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में मध्य प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने बताया कि प्रकरण की विस्तृत जांच पूरी हो चुकी है। जांच से संबंधित रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश कर दिया गया है।अभियोजन की मंजूरी पर राज्यपाल करेंगे फैसला सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को बताया कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन चलाने की स्वीकृति के संबंध में राज्य सरकार द्वारा भेजी गई सिफारिश फिलहाल राज्यपाल के पास विचाराधीन है। इस पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। इसी कानूनी स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल को इस विषय पर अपने स्तर से निर्णय लेने दिया जाए।अदालत के इस रुख से स्पष्ट है कि शीर्ष अदालत ने फिलहाल मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने को लेकर कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। अब आगे की कानूनी दिशा राज्यपाल द्वारा अभियोजन स्वीकृति पर लिए जाने वाले निर्णय से तय होगी।
CJI सूर्यकांत ने जांच रिपोर्ट की प्रक्रिया पर किया स्पष्ट संकेत सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस बात को रेखांकित किया कि जांच रिपोर्ट को नियमों के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास जाना ही होता है। यानी जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट को निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत संबंधित प्राधिकारी के समक्ष रखा जाना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि अदालत ने जांच पूरी होने के बावजूद अभियोजन स्वीकृति के मामले में सीधे कोई आदेश देने के बजाय संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया को आगे बढ़ने दिया है।
विजय शाह की ओर से माफी का मुद्दा भी अदालत में उठा सुनवाई के दौरान मंत्री विजय शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने मंत्री का पक्ष रखते हुए अदालत के सामने महत्वपूर्ण तथ्य रखा। उन्होंने बताया कि विवादित बयान के बाद मंत्री ने अगले ही दिन सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग ली थी। वरिष्ठ अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को भी मामले के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए। मंत्री पक्ष की ओर से यह दलील मामले में उनकी ओर से किए गए तत्काल सार्वजनिक खेद और स्पष्टीकरण को रेखांकित करती है।
मई 2025 के बयान से शुरू हुआ था विवाद गौरतलब है कि मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान प्रेस ब्रीफिंग का हिस्सा रहीं सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर मंत्री विजय शाह द्वारा सार्वजनिक मंच से की गई टिप्पणी पर विवाद खड़ा हुआ था। टिप्पणी को लेकर व्यापक राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं और मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा।विवाद बढ़ने के बाद मंत्री विजय शाह ने सार्वजनिक रूप से अपनी टिप्पणी पर खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी थी। अब मामले में SIT की जांच पूरी हो चुकी है और अभियोजन स्वीकृति का विषय राज्यपाल के समक्ष लंबित है।
अब राज्यपाल के फैसले पर टिकी निगाहें,सोमवार की सुनवाई के बाद फिलहाल सबसे अहम स्थिति यह है कि SIT की जांच पूरी हो चुकी है, रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सीलबंद लिफाफे में पेश की जा चुकी है और अभियोजन स्वीकृति का अंतिम निर्णय राज्यपाल के स्तर पर लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को इस विषय पर अपने स्तर से निर्णय लेने देने का रुख अपनाया है। इसलिए इस समय यह कहना जल्दबाजी होगी कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा निश्चित रूप से चलेगा। अब राज्यपाल के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अभियोजन की स्वीकृति मिलती है या नहीं और मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।
फिलहाल मंत्री विजय शाह के पक्ष में महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि शीर्ष अदालत ने आज की सुनवाई में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है और मामले को निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने दिया है।

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