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बर्थ डे पर फास्ट सो फर्स्ट डिवीजन में आने की गिफ्ट लेने के लिए हर श्वांस, संकल्प समर्थ हो, दिल बड़ी और सच्ची हो तो हर जरूरत पूरी होगी

आज जीरो बाप अपने हीरो बच्चों से मिलने आये हैं। आज का दिन आप सभी भी बाप का और बाप के साथ अपना भी बर्थ डे मनाने आये हैं। तो बापदादा सर्व बच्चों को चाहे सम्मुख बैठे हैं, चाहे दूर बैठे दिल के नजदीक बैठे हैं, चारों ओर के बच्चों को सर्व सम्बन्ध से मुबारक दे रहे हैं। उसमें भी विशेष तीन मुबारक बाप, शिक्षक और सतगुरू के रूप की तीन बधाईयां पालना, पढ़ाई और वरदानों की चारों ओर के बच्चों को विशेष दे रहे हैं। सभी बच्चों को मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

आज इस विशेष जन्म को भक्त भी मनाते हैं लेकिन आप बच्चे जानते हो कि यह बर्थ डे बाप और बच्चों के अविनाशी स्नेह का जन्म दिन है। आदि से लेके बाप और बच्चे साथ हैं, साथ में विश्व परिवर्तन के कार्य में भी बाप बच्चों के साथ है, क्योंकि बाप और बच्चों का बहुत-बहुत स्नेह है। अभी भी साथ हैं और अपने घर जाना है तो भी साथ जाना है। बाप बच्चों के सिवाए नहीं जा सकता और बच्चे बाप के सिवाए नहीं जा सकते क्योंकि दिल के स्नेह का साथ है। घर के बाद जब राज्य में आयेंगे तो भी ब्रह्मा बाप के साथ-साथ राज्य करेंगे। तो सर्व जन्मों से यह जन्म सबसे प्यारा और न्यारा है। इस जन्म की जो वैल्यू है वह सारे कल्प में 84 जन्म में नहीं है, ऐसा स्नेही और साथ वाला विशेष यह हीरे तुल्य जन्म है। तो आप सभी अपना जन्म दिन मनाने आये हो या बाप का मनाने आये हो! कि बाप बच्चों का मनाने आये हैं और बच्चे बाप का मनाने आये हैं? चारों ओर भक्त भी शिव जयन्ती वा शिवरात्रि कहके मनाते हैं, बड़े प्यार से मनाते हैं बापदादा भक्तों को देख करके भक्तों को भी भक्ति का फल देते हैं। लेकिन आपका मनाना और भक्तों का मनाना फर्क है। वह रात्रि मनाते हैं और आप अमृतवेला मनाते हैं, अमृतवेला श्रेष्ठ वेला है। अमृतवेले ही बापदादा हर एक बच्चे की झोली वरदानों से भर देते हैं। सभी की झोली वरदानों से भरी हुई है ना! रोज़ वरदाता बाप से वरदान मिलता ही है। कितने वरदान आप एक एक बच्चे को बापदादा द्वारा मिले हैं, वह वरदानों से झोली भरी हुई है ना। तो सभी बड़े उमंग-उत्साह से पहुंच गये हैं। बापदादा भी बच्चों को देख बहुत-बहुत खुश हो रहे हैं और गीत गाते रहते वाह बच्चे वाह! बच्चे कहते वाह बाबा वाह! और बाप कहते वाह बच्चे वाह! क्योंकि जो भी बाप के बच्चे बने हैं वह सभी कोटों में कोई आत्मायें हैं। विश्व में कितनी कोट आत्मायें हैं लेकिन उनमें से आप बच्चों ने जिसको बाप कहते हैं लक्की और लवली बच्चे हैं उन कोटों में से कोई आप बच्चे हो। नशा है कि हम ही कल्प-कल्प के कोटों में कोई बच्चे हैं। कितने भी बड़े-बड़े मर्तबे वाली आत्मायें वर्तमान समय भी हैं लेकिन बाप को पहचान, बाप का बर्थ डे मनाने वाले चारों ओर के पहचानने वाले बच्चे कोटों में कोई हैं। तो यह खुशी है कि हम कोटों में भी कोई हैं! नशा है! हाथ उठाओ। अविनाशी नशा है ना! कभी कभी वाला तो नहीं? सदा है और सदा ही रहेगा। माया पेपर तो लेती है, अनुभव है ना! माया का भी परमात्म बच्चों से ज्यादा प्यार है। बच्चे जानते हैं कि माया का परमात्म बच्चों से आदि से अब तक सम्बन्ध है। माया और परमात्म बच्चे दोनों का आपस में कनेक्शन है, लेकिन माया का काम है आना और आप बच्चों का काम क्या है? माया को दूर से भगाना। आने नहीं देना कि आने भी देते हो? नहीं। दूर से ही भगाओ। आने देते तो फिर उसकी आदत पड़ जाती है आने की। वह भी समझती है आने तो देते हैं ना, चलो। लेकिन बाप देखते हैं कि कोई कोई बच्चे माया को आने तो देते लेकिन खातिरी भी कर लेते, चाय पानी भी पिला लेते, पता है, कौन सी खातिरी करते हैं? माया के प्रभाव में आके यही सोचते कि अभी तो टूलेट का बोर्ड नहीं लगा है, अभी तो समय पड़ा है। पुरुषार्थ कर रहे हैं, पहुंच जायेंगे। तो माया भी समझती है एक तो आने दिया, दूसरा यह तो हमारे को साथ दे रहे हैं, खातिरी कर रहे हैं। कोई-कोई बच्चे माया को पहचान लेते हैं, लेकिन कोई कोई बच्चे पहचानने में भी गलती कर लेते हैं, माया की मत है वा बाप की मत है, न पहचानने के कारण माया के प्रभाव में आ जाते हैं। लेकिन बापदादा अपने लक्की महावीर विजयी बच्चों को कहते हैं आने नहीं दो, अब आवे और फिर भगाओ, इसमें समय नहीं लगाओ क्योंकि समय कम है और आपका जो वायदा है, विश्व परिवर्तक बन, विश्व सेवक बन विश्व की आत्माओं को बाप का परिचय दे मुक्ति का वर्सा दिलायेंगे, वह कार्य अभी समाप्त नहीं हुआ है। उस कार्य को समाप्त करने में समय लगाना है, अगर माया को भगाने में समय लगायेंगे तो विश्व परिवर्तक का जो वायदा है वह पूरा कैसे करेंगे! बाप के साथी हैं ना, जन्म से ही वायदा किया है, अब भी साथ रहेंगे, साथ चलेंगे... इसलिए अभी जो बाप से शक्तियां मिली हैं उन शक्तियों के आधार से माया को दूर से भगाओ। इसमें टाइम नहीं लगाओ। देखो, 70 वर्ष पुरुषार्थ करते रहे हो, अभी माया का आना और भगाना, अभी इसका समय नहीं है क्योंकि जानते भी हो, नॉलेजफुल तो हो ना! सारे ड्रामा की नॉलेज है, इसीलिए नॉलेजफुल बच्चे अभी समय किसमें लगाना है? दो खजाने बहुत जमा करने हैं। कौन से दो खजाने? एक संकल्प और दूसरा समय। दोनों खजाने महान हैं और आप सब जानते हो क्योंकि नॉलेजफुल बाप के नॉलेजफुल बच्चे हो। मास्टर नॉलेजफुल हैं ना! फुल, बुल नहीं। कोई कोई नॉलेजबुल हैं, नॉलेजफुल नहीं हैं। आप कौन हो, नॉलेजफुल हो? हाथ उठाओ। नॉलेजफुल या नॉलेजबुल? सभी नॉलेजफुल हैं? हाथ उठाया, अच्छा। वाह! फुल नॉलेज आ गई है! माया को भगाने की नॉलेज है? पीछे वालों को है? अच्छा। झण्डियां तो हिला रहे हैं। माताओं को है? मातायें नॉलेजफुल हैं? डबल फारेनर्स! डबल फारेनर्स भी झण्डियां हिला रहे हैं। अच्छा, देखो कितना अच्छा दृश्य लगता है। झण्डियां तो अच्छी लग रही हैं। तो नॉलेजफुल अर्थात् माया को दूर से भगाने वाले। तो ऐसे हो? क्योंकि बापदादा ने पहले ही कह दिया है कि खजाने जमा करने की बैंक सिर्फ इस समय संगमयुग में है फिर सारा कल्प जमा करने की बैंक नहीं मिलेगी। जो अब जमा किया, वह काम में लगता रहेगा। लेकिन जमा करने की बैंक अब संगमयुग पर खुलती है, इसीलिए आप क्या कहते हो! सभी को सन्देश में सुनाते हो ना, अब नहीं तो कब नहीं। तो आप सबको याद है ना! अब नहीं तो कब नहीं। यह सदा याद रहता है? क्योंकि संगमयुग का जन्म सबसे है छोटा सा लेकिन अमूल्य जन्म है। इस जन्म का मूल्य सारा कल्प चलता है। तो चेक करते हो, हमारा जमा का खाता कितना है? जितना चाहते हो उतना जमा होता है? क्योंकि बापदादा ने पहले ही कह दिया है कि अभी चलने का समय समाप्त हुआ। उड़ने का समय है। पुरुषार्थ का समय पूरा हुआ लेकिन अभी तीव्र पुरुषार्थ का समय है, वह भी थोड़ा है इसलिए बापदादा ने डबल विदेशियों को टाइटिल दिया है डबल तीव्र पुरुषार्थी। बोलो, डबल तीव्र पुरुषार्थी हो! हाथ उठाओ। डबल तीव्र पुरुषार्थी, पक्का। अच्छा। बापदादा तो जन्म की मुबारक के साथ आपको बधाई भी देते हैं। पदम पदम गुणा बधाईयां हो, बधाईयां हो, बधाईयां हो।

बापदादा ने देखा जो बापदादा ने होमवर्क दिया था, ओ.के. का। वह कई बच्चों ने अटेन्शन दिया है। लेकिन 100 मार्क्स बहुत थोड़ों के हैं। 50 परसेन्ट वाले ज्यादा हैं। लेकिन बापदादा यही चाहते हैं, सुनाये क्या चाहते हैं? बापदादा की यही हर एक आशाओं के दीपक, आशायें सम्पन्न करने वाले महावीर बच्चों से बाप की यही आशा है कि समय अनुसार अगर अब से बहुतकाल तीव्र पुरुषार्थ का चार्ट जमा नहीं किया तो फिर कब करेंगे! बापदादा समय प्रति समय तीन शब्द याद दिलाता है - एक अचानक, दूसरा एवररेडी और तीसरा बहुत समय का खाता जमा, क्योंकि बापदादा चाहते हैं कि बच्चे अपने राज्य में फर्स्ट जन्म से 21 जन्म अन्त तक फुल राज्य भाग्य के अधिकारी बनें। अभी तो यह खुशी है ना कि अपना राज्य आया कि आया। जैसे अभी सन्देश देते हो बाप आया है, ऐसे यह भी खुशखबरी सुनाते हो कि अपना दैवी राज्य सुख शान्तिमय राज्य आया कि आया। तो जब सबको यह सन्देश देते हो तो अपना पुरुषार्थ भी तीव्र बहुत समय का जमा करने वाला चाहिए। यह हिसाब बहुतकाल से स्मृति में रखो क्योंकि मजा नये घर में है। अगर दो तीन जन्म के बाद आये, दो तीन मास मकान को हो जाए तो क्या कहेंगे! नया है या 3 मास हो गया है? तो बापदादा चाहते हैं कि एक एक बापदादा का लाडला बच्चा, वाह वाह बच्चा, बाप के दिलतख्तनशीन बच्चा, पहले जन्म में ब्रह्मा बाप के साथी होके आवे। पसन्द है! पसन्द है? पसन्द है? अच्छा। तो क्या करना पड़ेगा? करना भी तो पड़ेगा ना। पसन्द तो है, बाप को भी पसन्द है लेकिन करना क्या पड़ेगा? अब से, चलो बीती सो बीती, बापदादा माफ कर देंगे, बीती। अब से बर्थ डे की सौगात बाप को क्या देंगे? बाप को कुछ तो सौगात देंगे ना। बाप का जन्म दिन मनाने आये हो, तो बाप को सौगात क्या देंगे? जो बाप की आशा है हर एक बच्चे में, लास्ट में फास्ट हो सकते हैं। जो पहले बारी आये हैं, वह हाथ उठाओ। अच्छा।

तो बापदादा सभी लास्ट आने वाले बच्चों को, पहले बारी आने की पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं। लेकिन एक भाग्य भी बता रहे हैं, भाग्य बनाने की मार्जिन है क्योंकि टूलेट का बोर्ड नहीं लगा है। अगर कोई लास्ट भी फास्ट पुरुषार्थ करे लास्ट सो फास्ट और फास्ट सो फर्स्ट डिवीजन में आ सकते हैं, फर्स्ट नम्बर नहीं, वह तो प्रसिद्ध हो गये हैं, लेकिन फर्स्ट डिवीजन में आ सकते हैं। पसन्द है? आने वाले नये बच्चों को पसन्द है? चांस है, बापदादा सीट दे देंगे लेकिन कुछ करना भी तो पड़ेगा। एक-एक श्वांस, एक-एक संकल्प अटेन्शन, हर श्वांस, हर संकल्प समर्थ हो, व्यर्थ न हो क्योंकि आप सबका चाहे पहले वालों का, चाहे पीछे वालों का लेकिन टाइटिल क्या है? समर्थ बच्चे हैं, कमजोर बच्चे नहीं। बापदादा यादप्यार क्या देते हैं? रोज़ का यादप्यार लाडले, सिकीलधे, दिलतख्तनशीन बच्चे, इसलिए बाप यह गोल्डन चांस दे रहा है लेकिन लेने वाले लो। बाप देगा, बंधा हुआ है। है कोई तीव्र पुरुषार्थी! चांस है। टूलेट का बोर्ड लग गया फिर फिनिश। लेकिन बापदादा को जन्म की सौगात क्या देंगे? जन्म उत्सव मनाने आये हो ना! बापदादा ने तो आप बच्चों के जन्म दिन पर आप सब बच्चों को विशष सौगात दी है कि 90 परसेन्ट आपका तीव्र पुरुषार्थ आज से अन्त तक अगर है तो 10 परसेन्ट बापदादा बढ़ा के देगा। मंजूर है। अभी व्यर्थ खत्म। जैसे देखो सतयुग के देवतायें आते हैं ना, तो उन्हों को पता नहीं यहाँ की भाषा क्या बोलते हैं। पुरुषार्थ शब्द कहेंगे ना, तो वो कहेंगे पुरुषार्थ क्या! क्योंकि प्रालब्ध वाले हैं ना। ऐसे आप तीव्र पुरुषार्थियों को स्वप्न में वा संकल्प में वा प्रैक्टिकल कर्म में व्यर्थ क्या होता है, उसकी समाप्ति हो। है हिम्मत? 10 परसेन्ट बाप ग्रेस में देंगे। है मंजूर। हाथ उठाओ। कितना परसेन्ट पक्का? 100 परसेन्ट, नहीं 101 परसेन्ट, क्योंकि बापदादा को बच्चों के बिना, बच्चों के साथ के बिना अच्छा नहीं लगता। बाप समझते हैं जब मेरा बाबा कह दिया और बाबा ने कह दिया मेरा बच्चा, तो बाप समान तो बनना पड़े। अभी दृढ़ संकल्प की आवश्यकता है। आप लोगों ने किताब छपाया है ना - दृढ़ संकल्प ही सफलता की चाबी है। तो संकल्प को कॉमन नहीं करो। आप हो कौन? अगर यहाँ का प्रेजीडेंट रिवाज़ी चलन चले तो अच्छा लगेगा, और आप कौन हो? आप तो तीन तख्त के निवासी हो। सबसे बड़ा तख्त बापदादा का दिलतख्त। तो दिलतख्त वाले पहले जन्म के साथी तो बनेंगे। भले तख्त पर एक बैठेगा लेकिन रॉयल फैमिली राज्य अधिकारी तो बन सकते हो। तो साथ निभाने वाले, घर तक तो साथ चलेंगे। बापदादा कैसे भी ले जायेंगे। वाया ले जाये या डायरेक्ट ले जाये लेकिन ले तो जायेंगे। तो क्या फिर घर में बैठ जायेंगे, ब्रह्मा बाप चला जायेगा और आप बैठ जायेंगे, अच्छा लगेगा? राजयोगी हो ना! अपने को क्या टाइटिल देते हो और दूसरे को भी क्या सिखाते हो? राजयोग या प्रजा योग? चाहे रॉयल प्रजा भी हो लेकिन प्रजायोगी तो नहीं हो? राजयोगी हो। तो सभी को बाप की आप सब बच्चों के प्रति दी हुई सौगात याद रहेगी? कब तक? अन्त तक। बापदादा ने देखा पुरुषार्थ बहुत करते हैं, बापदादा जब देखते हैं बच्चे मेहनत बहुत कर रहे हैं तो बच्चों की मेहनत देखकर बाप को अच्छा नहीं लगता है। इसीलिए मुहब्बत में रहो तो मेहनत खत्म हो जायेगी। मेरा बाबा, तो और मेरा खत्म। जब मेरा बाबा कहा तो अनेक मेरा उसमें खत्म हो गया ना। एक खिलौना लाते हो ना एक में एक, एक में एक होता है। एक में 10-12 समा जाते हैं, खिलौना बताते हो तो एक मेरा बाबा, मेरा बाबा कहने वाले हो ना। मेरा बाबा है ना! महारथियों का बाबा तो नहीं! मेरा बाबा। जब मेरा बाबा है तो हद का मेरा तेरे में समा लो। मेरे के बजाए तेरा कहो, कितना फर्क है, मेरा और तेरा कितना फर्क है? मे और ते। एक शब्द का फर्क है। तो पक्का है ना मेरा बाबा। पक्का है, कितना परसेन्ट? 100 परसेन्ट, 100 और एक। ऐसे एक अंगुली उठाओ। जो 101 कहते हैं, वह उठाओ। बापदादा देख रहे हैं। टी.वी. में भी देख रहे हैं। अच्छा।

चारों ओर के बापदादा के दिलतख्तनशीन बच्चों को, चारों ओर के तीव्र पुरुषार्थी बच्चों को, चारों ओर के बापदादा ने जो गिफ्ट दी, उस गिफ्ट को स्वीकार करने वाले और जो बच्चों ने संकल्प से बापदादा को गिफ्ट दी, उस संकल्प को सदा दृढ़ करने वाले ऐसे दृढ़ पुरुषार्थी, प्रतिज्ञा कर प्रत्यक्षता करने वाले सर्व बच्चों को बापदादा का बहुत-बहुत दिल का दुलार और दिल का यादप्यार स्वीकार हो और सभी बच्चों को बार बार बधाई, बधाई, बधाई।

वरदान:-मेहमानपन की वृत्ति द्वारा प्रवृत्ति को श्रेष्ठ, स्टेज को ऊंचा बनाने वाले सदा उपराम भव
जो स्वयं को मेहमान समझकर चलते हैं वे अपने देह रूपी मकान से भी निर्मोही हो जाते हैं। मेहमान का अपना कुछ नहीं होता, कार्य में सब वस्तुएं लगायेंगे लेकिन अपनेपन का भाव नहीं होगा। वे सब साधनों को अपनाते हुए भी जितना न्यारे उतना बाप के प्यारे रहते हैं। देह, देह के संबंध और वैभवों से सहज उपराम हो जाते हैं। जितना मेहमानपन की वृत्ति रहती उतनी प्रवृत्ति श्रेष्ठ और स्टेज ऊंची रहती है।
स्लोगन:-अपने स्वभाव को निर्मल बना दो तो हर कदम में सफलता समाई हुई है।

कार्यालय:-राजयोगभवन,E-5 अरेरा कॉलोनी भोपल मप्र,

संपर्क:-ईश्वरीय सेवा और सहयोग में बी.के.इंजीनियर नरेशबाथम:-9691454063,9406564449

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