भोपाल 21मई/मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में की जनजातीय कार्य विभाग की योजनाओं एवं अन्य गतिविधियों की समीक्षा
जनजातीय अंचलों के विकास को नई गति: जैविक खेती, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा फोकस।
मंत्रालय में आयोजित जनजातीय कार्य विभाग की योजनाओं एवं गतिविधियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने जनजातीय क्षेत्रों के समग्र, संतुलित और आत्मनिर्भर विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के जनजातीय अंचलों में जैविक खेती को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जाए, ताकि जनजातीय कृषकों की आय बढ़े और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में जनजातीय किसानों द्वारा सफलतापूर्वक जैविक खेती की जा रही है, जिसका अध्ययन करने के लिए मध्यप्रदेश से एक विशेषज्ञ दल भेजा जाए, ताकि वहां की सफल व्यवस्थाओं को प्रदेश में भी लागू किया जा सके।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विभिन्न विभागों के समन्वय और कन्वर्जेंस मॉडल के माध्यम से जनसुविधाओं का विस्तार सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आजीविका और रोजगार जैसे विषयों पर विभाग मिलकर कार्य करें। उन्होंने समाजसेवी संगठनों की सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर देते हुए कहा कि परंपरागत सामाजिक मूल्यों और संस्कृति के संरक्षण में समाज की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक में मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय के पास प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान की समृद्ध विरासत है, जिसका उपयोग कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया और सहारिया समुदायों के समग्र विकास के लिए सतत और संवेदनशील प्रयास जारी रखने के निर्देश भी दिए।
शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित विद्यालयों, आश्रमों और छात्रावासों में शिक्षा एवं रहन-सहन की गुणवत्ता बेहतर करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही जनजातीय युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनेगी। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2026 के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणामों में प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ 10 जिलों में से 7 जनजातीय जिले शामिल रहे हैं, जो विभागीय प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।बैठक में यह भी बताया गया कि दिसंबर 2023 से अब तक जनजातीय वर्ग के कक्षा 9वीं और 10वीं के 3 लाख 65 हजार विद्यार्थियों को 137 करोड़ 52 लाख रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई है। वहीं पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 4 लाख 28 हजार विद्यार्थियों को 673 करोड़ 64 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई। विभाग द्वारा वर्तमान में 2671 छात्रावास एवं आश्रम शालाओं का संचालन किया जा रहा है, जिनमें विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने बैठक में जानकारी देते हुए बताया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिला मुखियाओं को शासन की आहार अनुदान योजना के तहत प्रतिमाह 1500 रुपये की सहायता राशि सीधे बैंक खातों में प्रदान की जा रही है। दिसंबर 2023 से अब तक 2 लाख 37 हजार 550 महिलाओं को कुल 432 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है।
समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में जनजातीय समाज के विकास, शिक्षा, आजीविका और सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

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