भोपाल 10फरवरी/मंत्रि-परिषद ने दी 7,133 करोड़ से अधिक की योजनाओं को मंजूरी
मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने पत्रकारों को दी मंत्रि-परिषद के निर्णयों की विस्तृत जानकारी,जनजातीय कल्याण, महिला-बाल विकास, ऊर्जा विस्तार और पेंशन सुधारों पर ऐतिहासिक फैसले।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 10 फरवरी 2026, मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की महत्वपूर्ण बैठक वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ संपन्न हुई। बैठक में राज्य के सामाजिक, शैक्षणिक, ऊर्जा, न्यायिक और प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़े कई दूरगामी एवं जनहितकारी निर्णय लिए गए। बैठक के पश्चात सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने पत्रकारों को मंत्रि-परिषद के निर्णयों की विस्तृत जानकारी दी।
मंत्री काश्यप ने बताया कि मंत्रि-परिषद द्वारा वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जनजातीय कार्य विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख योजनाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कुल 7,133 करोड़ 17 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह निर्णय प्रदेश के जनजातीय समाज, महिलाओं, बच्चों एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। स्वीकृत राशि के अंतर्गत जनजातीय कार्य विभाग की पीवीटीजी आहार अनुदान योजना के लिए 2,350 करोड़ रुपये, एकीकृत छात्रावास योजना के लिए 1,703 करोड़ 15 लाख रुपये, सीएम राइज विद्यालय योजना के लिए 1,416 करोड़ 91 लाख रुपये तथा आवास सहायता योजना के लिए 1,110 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसके अतिरिक्त माध्यमिक शिक्षा मंडल को शुल्क की प्रतिपूर्ति, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति तथा कक्षा 9वीं की छात्रवृत्ति योजना के लिए 522 करोड़ 8 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के लिए 31 करोड़ 3 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई, जिससे महामारी से प्रभावित बच्चों को निरंतर सहायता मिलती रहेगी।
मंत्रि-परिषद ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JGUA) के अंतर्गत प्रदेश के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी प्राथमिकता दी। अभियान के तहत विद्युत अधोसंरचना विस्तार के माध्यम से 63,077 अविद्युतीकृत घरों एवं 650 अविद्युतीकृत शासकीय संस्थानों के विद्युतीकरण के लिए 366 करोड़ 72 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना में केंद्र शासन से 220 करोड़ 3 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त होगा, जबकि राज्य शासन का अंश 146 करोड़ 69 लाख रुपये रहेगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा 8,521 घरों को ऑफ-ग्रिड प्रणाली के माध्यम से विद्युतीकृत करने के लिए 97 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को भी मंजूरी दी गई है। योजना के अंतर्गत जिन बसाहटों में प्रति घर अनुमानित लागत 2 लाख रुपये तक है, वहां राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा ऑन-ग्रिड प्रणाली से विद्युतीकरण किया जाएगा। वहीं खेतों पर बने घर, 5 घरों से छोटी बसाहटें तथा अत्यंत दूरस्थ क्षेत्र, जहां लागत 2 लाख रुपये प्रति घर से अधिक है, वहां 1 किलोवाट क्षमता की सोलर-बैटरी आधारित ऑफ-ग्रिड प्रणाली से बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। ऑफ-ग्रिड विद्युतीकरण का संपूर्ण व्यय राज्य शासन द्वारा वहन किया जाएगा।
मंत्रि-परिषद ने न्यायिक क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को भी बड़ी राहत प्रदान की। उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों के आईटी संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को तकनीकी संवर्ग की वर्तमान और भावी भर्ती प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए केवल एक बार 5 वर्ष की आयु-सीमा में छूट देने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में अनारक्षित वर्ग के लिए अधिकतम आयु 40 वर्ष और आरक्षित वर्ग के लिए 45 वर्ष निर्धारित है। बैठक में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन का सारांशीकरण) नियम 2026 का अनुमोदन किया। इन नियमों के प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है। नए नियमों के तहत प्रक्रियाओं और अधिकारिताओं को सरल बनाया गया है, जिससे पेंशनर्स को अधिक सुविधा मिलेगी और प्रकरणों का निराकरण समय-सीमा में हो सकेगा। पेंशन के सारांशीकरण की प्रक्रिया एवं मूल्य गणना को भी आसान बनाया गया है। नियम-44 के अंतर्गत परिवार पेंशन के पात्र सदस्यों में अब अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुत्री को भी शामिल किया गया है।
इसके अतिरिक्त मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन) नियम 2026 तथा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत उपदान के संदाय से संबंधित नियमों का भी अनुमोदन किया। ये नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावशील होंगे। नए प्रावधानों में अभिदाता की मृत्यु की स्थिति में परिवार पेंशन, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, ई-सेवा पुस्तिका, केंद्र और राज्य शासन की पूर्व सेवाओं को जोड़ने, निलंबन अवधि में अंशदान तथा सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र या मृत्यु की दशा में स्पष्ट निकास प्रावधान शामिल किए गए हैं। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत आने वाले शासकीय सेवकों के लिए उपदान की पात्रता निर्धारण और भुगतान की स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है। सेवा-निवृत्ति के बाद विभागीय जांच की स्थिति में उपदान से वसूली, जांच अवधि में नियोक्ता अंशदान रोकने तथा नियमों के शिथिलीकरण के लिए राज्य शासन की शक्ति के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मंत्रि-परिषद के ये निर्णय प्रदेश में सामाजिक न्याय, शिक्षा, ऊर्जा, प्रशासनिक पारदर्शिता और कर्मचारी कल्याण को नई दिशा देने वाले साबित

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