भोपाल 16फरवरी/विकसित मध्यप्रदेश संकल्प से सिद्धि की ओर सुनियोजित विकास पथ
विशेष लेख : पत्रकार अभिषेक शर्मा
मध्यप्रदेश ने वर्ष 2025-26 के बजट में जिस "विकसित मध्यप्रदेश की परिकल्पना की थी, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 से यह स्पष्ट होता है कि उस दिशा में राज्य ने परिणामोन्मुख प्रगति की है। विकास की प्रक्रिया को 4 स्तंभों आधारभूत संरचना, मानवीय पूंजी, समावेशन तथा वित्तीय अनुशासन पर आधारित करते हुए सरकार ने जो लक्ष्य निर्धारित किए थे, उनके क्रियान्वयन के ठोस प्रमाण अब सामने आ रहे हैं।
राज्य की अर्थव्यवस्था को व्यापक परिदृश्य में देखने पर स्पष्ट होता है कि विकास केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके ठोस परिणाम भी परिलक्षित हो रहे हैं। वितीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में प्रचलित भाव पर मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 21,69,750 करोड अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.14 प्रतिशत अधिक है। वहीं स्थिर (2011-12) भाव पर GSDP 27,81,911 करोड़ ऑका गया है, जो वास्तविक उत्पादन में 8.04 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। यह वृद्धि केवल मूल्य स्तरों में परिवर्तन का परिणाम नहीं, बल्कि वास्तविक आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का संकेत है, जैसा कि सर्वेक्षण में स्पष्ट किया गया है। क्षेत्रीय संरचना पर दृष्टि डाले तो सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) की संरचना में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों की संतुलित भागीदारी परिलक्षित हो रही है। प्राथमिक क्षेत्र का कुल GSVA 2025-26 में प्रचलित भाव पर 6,79,817 करोड़ रूपये तक पहुँचा है, जो कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की निरंतर भूमिका को रेखांकित करता है। समग्र रूप से, ये संकेतक दर्शाते हैं कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था संरचनात्मक रूप से विविधीकृत और वास्तविक उत्पादन-आधारित विकास पथ पर अग्रसर है।
आधारभूत संरचना-आधारित विकास के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्रों के सुदृढीकरण, क्लस्टर विकास तथा अधोसंरचना निवेश पर विशेष बल दिया गया था। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के 172 औद्योगिक क्षेत्र कार्यरत हैं तथा वर्ष 2024-25 में 200 करोड रुपये और वर्ष 2025-26 में नवंबर 2025 तक 68.11 करोड़ रुपये अधोसंरचना विकास हेतु स्वीकृत वितरित किए गए। राज्य क्लस्टर योजना के अंतर्गत निजी भूमि पर 6 क्लस्टरों को अनुमति दी गई, जिनमें लगभग 227 इकाइयों की स्थापना तथा 6650 रोजगार सृजन का लक्ष्य है। यह "मैन्युफैक्चरिंग सर्ज और रणनीतिक औद्योगिक विकास की उस घोषणा का प्रत्यक्ष क्रियान्वयन है, जिसमें क्षेत्रीय संतुलन और रोजगारोन्मुख औद्योगीकरण को प्राथमिकता दी गई थी।
उच्च गति संपर्क और बाजार पहुँच को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ओडीओपी, स्टार्ट-अप तथा एमएसएमई कार्यक्रमों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों से जोड़ा गया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में "ओडीओपी ग्राम' की स्थापना तथा अनेक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर यह दर्शाते हैं कि बजट में घोषित 'स्थानीय से वैश्विक रणनीति को कार्यरूप मिला। इसी प्रकार, उद्यम पंजीकरण के ऑकड़े बताते हैं कि जनवरी 2026 तक राज्य के 99.09 प्रतिशत पंजीकृत उद्यम सूक्ष्म श्रेणी के हैं, जो स्वरोजगार और लघु उद्यमिता के विस्तार को इंगित करते हैं।
मानवीय क्षमता निर्माण के क्षेत्र में कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता को समेकित रूप से आगे बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में 891 इकाइयों को 29.42 करोड़ रुपये मार्जिन मनी वितरित कर 2942 व्यक्तियों को रोजगार मिला, जबकि वर्ष 2025-26 में नवंबर 2025 तक 565 इकाइयों के माध्यम से 2551 रोजगार सृजित हुए। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजनाके लिये 130.02 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया था, जिसका उद्देश्य स्वरोजगार को बढ़ावा देना था। यह स्पष्ट करता है कि 'स्किल से एंटरप्राइज की परिकल्पना केवल घोषणात्मक नहीं, बल्कि परिणामपरक है।
स्वास्थ्य और शिक्षा से उद्यम तक की श्रृंखला को भी सुदृढ किया गया है। स्टार्ट-अप नीति 2025 के अंतर्गत दिसंबर 2025 तक 1723 स्टार्ट-अप को भारत सरकार से मान्यता प्राप्त हुई। वर्ष 2021 में स्टार्ट-अप नीति लागू होने के पश्चात वर्ष 2025 तक मध्यप्रदेश में स्टार्ट-अप की संख्या में 209 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसी अवधि में महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्ट-अप में 225 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो समावेशी उद्यमिता की दिशा में राज्य की सतत प्रगति को दर्शाता है।
उद्यमियों एवं प्रारंभिक चरण के स्टार्ट-अप को मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करने हेतु राज्य में कुल 103 इनक्यूबेटर संचालित हैं, जिनमें से 32 इनक्यूबेटर वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक स्थापित किए गए हैं। यह बजट में व्यक्त उस लक्ष्य की पूर्ति है जिसमें नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही गई थी।
समावेशी एवं सतत विकास की दिशा में कृषि आधारित क्लस्टरों, स्फूर्ति योजना के अंतर्गत 36 क्लस्टरों में 24,878 कारीगरों की भागीदारी तथा हथकरघा हस्तशिल्प क्षेत्रों में वित्तीय सहायता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया गया। हरित विकास की अवधारणा को ऊर्जा दक्षता, क्लस्टर आधारित उत्पादन और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से जोड़ा गया है, जिससे पर्यावरण और आजीविका दोनों को संतुलित आधार मिला है।
वित्तीय अनुशासन और सुशासन के संदर्भ में आर्थिक सर्वेक्षण संकेत देता है कि राज्य ने पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देते हुए विकासात्मक व्यय की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया है। योजनाओं के लक्षित क्रियान्वयन, पोर्टल-आधारित पंजीकरण प्रणाली तथा संस्थागत डिजिटलीकरण से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को व्यवहारिक रुप मिला है। बजट 2025-26 में जिस राजकोषीय संयम और विकासोन्मुख व्यय संरचना की घोषणा की गई थी, वह सर्वेक्षण में प्रदर्शित पूंजी निवेश और लक्षित व्यय से पुष्ट होती है।
मध्यप्रदेश में विकास आकस्मिक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध और चरणबद्ध प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ रहा है। अधोसंरचना से उद्योग, कौशल से उद्यम, कृषि से क्लस्टर और वित्तीय अनुशासन से सुशासन तक प्रत्येक क्षेत्र में बजट की घोषणाएँ अब ठोस परिणामों में परिवर्तित होती दिखाई दे रही हैं। 'विकसित मध्यप्रदेश का लक्ष्य केवल एक नारा नहीं, बल्कि व्यवस्थित नीति, संसाधन निवेश और सतत क्रियान्वयन का प्रतिफल बनता जा रहा है। यही क्रमबद्ध प्रगति राज्य को उच्च विकास पथ पर स्थिरता के साथ आगे ले जा रही है।

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