सीतानगर मध्य सिंचाई परियोजना में डीपीआर बदलाव पर विधानसभा में घमासान,मंत्री तुलसीराम सिलावट ने दिए जांच के संकेत।

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान दमोह जिले की सीतानगर मध्य सिंचाई परियोजना में मूल डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में किए गए बदलाव को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। विधायक एवं पूर्व मंत्री जयंत मलैया ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट का ध्यान आकर्षित किया।

विधायक मलैया ने सदन में प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर बताया कि वर्ष 2018 में सीतानगर मध्य सिंचाई परियोजना को 518.09 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी गई थी। परियोजना के तहत पथरिया तहसील के 22 गांव और दमोह तहसील के 62 गांव सहित कुल 84 गांवों में 16,200 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रेसराइज्ड पाइप नहर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जानी थी। इस परियोजना की मूल डीपीआर को 14 जून 2018 को प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हुई थी और कार्य जून 2023 तक पूर्ण किया जाना निर्धारित था। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्य प्रारंभ होने के बाद निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से मूल डीपीआर में बदलाव किया गया। इस बदलाव के चलते दमोह तहसील के 62 गांवों में से 33 गांवों को परियोजना से बाहर कर दिया गया और लगभग 9180 हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र कम कर दिया गया। वहीं पथरिया तहसील के गांवों को यथावत रखते हुए उनके सिंचाई क्षेत्र में 4800 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7020 हेक्टेयर तक विस्तार कर दिया गया।

विधायक मलैया ने सवाल उठाया कि बिना किसी स्पष्ट कारण और सार्वजनिक सूचना के डीपीआर में इतना बड़ा परिवर्तन क्यों किया गया। उन्होंने इसे संभावित भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए कहा कि लगभग 100 करोड़ रुपये की राशि परियोजना में बची हुई है, जिससे गड़बड़ी की आशंका और प्रबल होती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावित 33 गांवों के किसानों को सिंचाई का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे क्षेत्र में भारी असंतोष व्याप्त है। विधायक मलैया ने जानकारी दी कि 27 जनवरी 2026 को इन गांवों के किसानों द्वारा इस मुद्दे को लेकर आंदोलन भी किया गया। किसानों की मांग है कि या तो उन्हें पुनः इस परियोजना में शामिल किया जाए या फिर किसी अन्य सिंचाई योजना के माध्यम से लाभ दिया जाए।

इस पर जवाब देते हुए जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि परियोजना की डीपीआर में बदलाव तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से किया गया हो सकता है, लेकिन यदि इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री सिलावट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन गांवों को परियोजना से बाहर किया गया है, उनके हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देने की बात कही कि प्रभावित गांवों का पुनर्मूल्यांकन कर उन्हें किसी अन्य उपयुक्त सिंचाई योजना से जोड़ा जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। सिलावट ने सदन में यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करेगी तथा किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों ही पक्षों के सदस्यों ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दीं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह मामला केवल एक क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश में विकास कार्यों की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। सदन में उठे इस मुद्दे के बाद अब सभी की नजरें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच के आदेश जारी होते हैं, तो यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। वहीं प्रभावित किसानों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही न्याय मिलेगा और उनकी सिंचाई की समस्या का समाधान किया जाएगा।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal