“संडे वाली दीदी” की अनोखी पहल, रेलवे की ड्यूटी के साथ झुग्गी-बस्तियों में बाँटती हैं खुशियां, वंचित बच्चों के जीवन में भर रहीं नई उम्मीद,सामाजिक कार्य ने दिलाई प्रसिद्धि, इटली की कोनियो यूनिवर्सिटी ने प्रदान की डॉक्टरेट की उपाधि।

पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल रेल मंडल में कार्यरत कार्यालय अधीक्षक डॉ. मधु शर्मा केवल अपने प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं। पिछले 26 वर्षों से वे गरीब और वंचित बच्चों की शिक्षा, संस्कार और समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। उनके इसी समर्पण और सेवा भाव के कारण झुग्गी-बस्तियों के बच्चे उन्हें स्नेहपूर्वक “संडे वाली दीदी” के नाम से जानते हैं।

रेलवे की व्यस्त नौकरी के बावजूद डॉ. मधु शर्मा ने समाज के कमजोर वर्गों के लिए जो सेवा का मार्ग चुना है, वह समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन गया है। उनके उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। इसी कड़ी में इटली की कोनियो यूनिवर्सिटी ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि देकर सम्मानित किया है, जो उनकी सेवा भावना और समर्पण का प्रतीक है।नौकरी के साथ सेवा का अनूठा संतुलन डॉ. मधु शर्मा सप्ताह के सोमवार से शुक्रवार तक रेलवे की अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करती हैं। लेकिन जैसे ही सप्ताहांत आता है, उनका पूरा समय समाज सेवा के लिए समर्पित हो जाता है। हर शनिवार वे सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों से संवाद करती हैं और उन्हें प्रेरक भाषण, जीवन कौशल, नैतिक शिक्षा तथा लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा देती हैं। वे बच्चों को यह समझाने का प्रयास करती हैं कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा और सकारात्मक सोच के बल पर जीवन में सफलता हासिल की जा सकती है।

रविवार को झुग्गी-बस्तियों में “खुशियों की पाठशाला” रविवार का दिन डॉ. मधु शर्मा के लिए विशेष होता है। इस दिन वे झुग्गी-बस्तियों में जाकर बच्चों के साथ समय बिताती हैं। यहां वे बच्चों को स्वच्छता, योग, भारतीय संस्कृति, सामान्य ज्ञान और व्यक्तित्व विकास की शिक्षा देती हैं। बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ वे उन्हें प्रेरणादायक कहानियां भी सुनाती हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित होती है। उनके इस स्नेहपूर्ण व्यवहार और निरंतर मार्गदर्शन के कारण बच्चे उन्हें प्यार से “संडे वाली दीदी” कहकर पुकारते हैं। उनकी इस पहल से कई बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ी है और वे अपने जीवन में आगे बढ़ने का सपना देखने लगे हैं।

महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए अभियान डॉ. मधु शर्मा केवल बच्चों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मबल को मजबूत करने के लिए भी लगातार प्रयास कर रही हैं। वे नियमित रूप से ऑनलाइन और ऑफलाइन निःशुल्क सत्र आयोजित करती हैं, जिनमें महिलाओं को मानसिक तनाव, अवसाद और पारिवारिक चुनौतियों से निपटने के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है। योग और सकारात्मक सोच के माध्यम से वे महिलाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास करती हैं। उनके इन प्रयासों से कई महिलाएं जीवन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास महसूस कर रही हैं।दृष्टिबाधित बच्चों की पढ़ाई में सहयोग समाज सेवा के अपने मिशन में डॉ. मधु शर्मा ने दृष्टिबाधित बच्चों को भी शामिल किया है। वे स्वयं पाठ्य सामग्री को रिकॉर्ड कर ऑडियो के रूप में उपलब्ध कराती हैं, ताकि दृष्टिबाधित छात्र आसानी से अपनी पढ़ाई कर सकें। यह कार्य न केवल उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि वे शिक्षा को हर बच्चे तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

मोबाइल और नशे से दूर करने का प्रयास आज के समय में बच्चों में मोबाइल और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय बनती जा रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए डॉ. मधु शर्मा बच्चों को खेल, योग, सांस्कृतिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों से जोड़ने का प्रयास करती हैं। उनका मानना है कि यदि बच्चों को सही दिशा और सकारात्मक वातावरण मिले, तो वे गलत आदतों से दूर रहकर अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं। सैकड़ों बच्चों के जीवन में बदलाव डॉ. मधु शर्मा पिछले 13 वर्षों से भोपाल में समाज सेवा के माध्यम से बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। इससे पहले वे लगभग 14 वर्षों तक शाजापुर में भी इसी प्रकार समाज सेवा के कार्यों से जुड़ी रहीं। इन वर्षों में उन्होंने सैकड़ों गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षा, संस्कार और आत्मविश्वास की राह दिखाई है। कई बच्चे आज पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और अपने जीवन के लक्ष्य तय कर रहे हैं।

रेल मंडल के लिए गर्व की बात डॉ. मधु शर्मा की समाज सेवा से न केवल बच्चों और महिलाओं को लाभ मिल रहा है, बल्कि इससे पश्चिम मध्य रेलवे का भोपाल रेल मंडल भी गौरवान्वित महसूस कर रहा है।उनकी यह पहल यह संदेश देती है कि यदि व्यक्ति में सेवा भावना और समर्पण हो, तो वह अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच भी समाज के लिए बहुत कुछ कर सकता है। आज “संडे वाली दीदी” के नाम से पहचानी जाने वाली डॉ. मधु शर्मा उन लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का सपना देखते हैं। उनका यह प्रयास साबित करता है कि छोटी-छोटी पहल भी किसी के जीवन में बड़ी खुशियां ला सकती हैं।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal