वैश्विक तनाव के बीच सोने-चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार, 28 मई को वैश्विक बाजार में सोना लुढ़ककर करीब दो महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। ईरान पर अमेरिका के नए सैन्य हमलों और मजबूत होते डॉलर ने वैश्विक कमोडिटी बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे निवेशकों में यह डर पैदा हो गया है कि महंगाई उम्मीद से ज्यादा समय तक बरकरार रह सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड (हाजिर सोना) 1.1% की गिरावट के साथ $4,406.81 प्रति औंस पर आ गया, जो 27 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 0.9% टूटकर $4,404.90 पर बंद हुआ। चांदी भी दबाव में रही और स्पॉट चांदी 1.7% गिरकर $73.34 प्रति औंस पर आ गई। हालांकि, बकरीद के अवकाश के कारण गुरुवार को भारतीय कमोडिटी बाजार बंद रहे।
डॉलर की मजबूती और अमेरिकी हमलों से गिरा बाजार
बुलियन (सोना-चांदी) की कीमतों में आई इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। डॉलर इंडेक्स में बढ़त के कारण अन्य विदेशी मुद्राओं के खरीदारों के लिए सोने में निवेश करना महंगा हो गया है। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित ईरानी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों ने बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ किसी भी समझौते की खबरों को खारिज करने के तुरंत बाद ये हमले हुए। इन हमलों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें करीब 2% बढ़ गईं, जिससे आने वाले समय में ऊर्जा जनित महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों में कटौती की घटी उम्मीदें
आमतौर पर युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव के समय सोने को सबसे सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माना जाता है और इसकी मांग बढ़ती है। लेकिन इस बार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रह सकती है, जिसके कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना बेहद कम हो गई है। फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक ने भी संकेत दिए हैं कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक को अभी शॉर्ट-टर्म ब्याज दरें स्थिर रखनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टैरिफ, ईरान विवाद और एआई निवेश के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ता है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने पर भी विचार कर सकता है।
बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए हांगकांग एक्सचेंज की नई पहल
वैश्विक बाजार की इस उथल-पुथल के बीच हांगकांग फ्यूचर्स एक्सचेंज ने बाजार में निवेशकों की हिस्सेदारी और लिक्विडिटी को बेहतर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एक्सचेंज ने घोषणा की है कि वह गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के लिए मार्केट-वाइड ट्रेडिंग फीस में डिस्काउंट और नए इंसेंटिव प्रोग्राम की शुरुआत करेगा, ताकि सुस्त पड़े बाजार को फिर से गति दी जा सके।
क्या है सोने-चांदी का अगला टारगेट और आउटलुक?
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि मॉनेटरी पॉलिसी की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी तनाव के कारण सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का यह दौर आगे भी जारी रह सकता है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार महत्वपूर्ण स्तर:
सोना (Gold): वर्तमान में सोना $4,450–$4,600 की रेंज के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा है। यदि यह गिरावट जारी रहती है, तो भारी मुनाफावसूली (Profit-Booking) देखने को मिल सकती है, जिससे अगला डाउनसाइड टारगेट $4,380 प्रति औंस तक जा सकता है।
चांदी (Silver): चांदी की कीमतें फिलहाल $72 से $78.50 प्रति औंस की बड़ी रेंज में घूम रही हैं। जब तक अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक बाजार की चाल सीमित रहने की संभावना है।

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