श्रेष्ठ प्रशासन एवं आंतरिक सशक्तिकरण के लिए प्रभावशाली मेडिटेशन अनिवार्य डॉ. अवधेश प्रताप सिंह,अच्छे प्रशासक में निष्ठा, ईमानदारी और अनुशासन का होना जरूरी राजयोगिनी आशा दीदी।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के अन्तर्राष्ट्रीय मुख्यालय शान्तिवन, आबू रोड में “प्रभावशाली प्रशासन के लिए मेडिटेशन” विषय पर प्रशासक वर्ग का महासम्मेलन आरंभ हुआ। यह आयोजन 5 से 9 सितम्बर तक जारी रहेगा।

इस महासम्मेलन में भारत और नेपाल से लगभग 2000 प्रशासनिक सेवाओं – सिविल सेवा, वन, रेलवे, बैंकिंग एवं अन्य क्षेत्रों से जुड़े वरिष्ठ प्रशासक भाग ले रहे हैं। आयोजन का दायित्व राजयोग एजुकेशन एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन के प्रशासनिक सेवा प्रभाग द्वारा निभाया जा रहा है।

डॉ. अवधेश प्रताप सिंह का संदेश:मध्यप्रदेश विधानसभा, भोपाल के प्रमुख सचिव डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा वर्तमान समय में गिरते सामाजिक मूल्यों और तनावपूर्ण वातावरण में प्रशासकों को आध्यात्मिक सशक्तिकरण की आवश्यकता है। प्रशासक, कार्यपालक एवं प्रबंधक अनेक प्रकार के प्रशासनिक, सामाजिक और राजनीतिक दबावों का सामना करते हैं, ऐसे में राजयोग मेडिटेशन जीवन में संतुलन लाने का श्रेष्ठ साधन है। मेडिटेशन से मन शांत, बुद्धि संतुलित और आत्मअनुशासन की प्रवृत्ति विकसित होती है, जिससे निर्णय क्षमता और रचनात्मकता बढ़ती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि स्वयं राजयोग अपनाने से उन्हें विधानसभा व प्रशासन के तनावपूर्ण क्षणों में सही निर्णय लेने में मदद मिली। एक प्रशासक को सदैव शांतचित्त और संवेदनशील रहना चाहिए, क्योंकि समाज में संवेदनशीलता की निरंतर कमी हो रही है।

अन्य वक्ताओं के विचार राजयोगिनी आशा दीदी, अध्यक्ष प्रशासनिक सेवा प्रभाग – “अच्छे प्रशासक में ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और अनुशासन अनिवार्य हैं। राजयोग से इन गुणों को विकसित किया जा सकता है।”श्रीमती ए. धनलक्ष्मी, संयुक्त सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार – “भारत को विश्वगुरु बनाने का मार्ग केवल अध्यात्म है। प्रशासक को गुस्से और जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए।”विभूति रंजन चौधरी, अतिरिक्त सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, बिहार – “तेजी से बदलते प्रशासनिक परिवेश में मेडिटेशन अत्यंत आवश्यक हो गया है। यह कार्यक्षमता और निर्णय क्षमता को बढ़ाता है।”

बीके करूणा, अतिरिक्त महासचिव, ब्रह्माकुमारीज – “शान्ति हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। देश में सुख-शान्ति कायम रखना प्रशासकों की जिम्मेदारी है।”

विशेष आकर्षण समारोह में ब्रह्माकुमारी जयन्ती दीदी, बीके मृत्युंजय भाई, अजमेर के डीआरएम राजीव धनखेर सहित कई वरिष्ठ वक्ताओं ने संबोधन दिया। बीके पूनम दीदी (जयपुर) ने राजयोग अनुभूति कराई। स्वागत गीत मधुर वाणी ग्रुप ने प्रस्तुत किया, वहीं दिल्ली व लखनऊ की बालिकाओं ने स्वागत नृत्य से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।

इस प्रकार, “प्रभावशाली प्रशासन के लिए मेडिटेशन” विषय पर यह महासम्मेलन प्रशासकों को आत्मसशक्तिकरण का संदेश देता हुआ समाज एवं शासन में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा तय कर रहा है।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal