जनजातीय विकास की नई दिशा हर विकासखण्ड में सांदीपनि विद्यालय, स्कूलों में स्मार्ट क्लास, 86 क्षेत्रों में कला भवन और जनजातीय कलाओं को जी.आई. टैग।

मध्यप्रदेश में जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास को नई गति देते हुए राज्य सरकार आगामी तीन वर्षों में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए शिक्षा सुविधाओं का अभूतपूर्व विस्तार करने जा रही है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दो वर्षों की विभागीय उपलब्धियों पर आयोजित पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य जनजातीय क्षेत्रों में “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच” सुनिश्चित करना है।

डॉ. शाह ने बताया कि प्रत्येक जनजातीय विकासखण्ड में सांदीपनि विद्यालय की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही अधोसंरचना विकास के तहत स्कूलों में स्मार्ट क्लास, आधुनिक प्रयोगशालाएं और लाइब्रेरी सुविधाओं का उन्नयन किया जाएगा। विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए हर जनजातीय विकासखण्ड में एकलव्य विद्यालय, माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर और बालक आदर्श आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे।शिक्षा के साथ-साथ जनजातीय समाज की आस्था और संस्कृति के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनजातीय श्रद्धा एवं पूजा स्थलों का उन्नयन किया जाएगा। सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश के 86 जनजातीय विकासखण्डों में कला भवन बनाए जाएंगे, जहां जनजातीय कला, नृत्य, संगीत और परंपराओं को मंच मिलेगा।

डॉ. शाह ने कहा कि जनजातीय कलाओं को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता मिली है। डिंडोरी जिले की गोंड पेंटिंग को जी.आई. टैग प्राप्त हो चुका है। इसके अलावा सात अन्य उत्पादों को जी.आई. टैग दिलाने की प्रक्रिया जारी है, जिनमें भील जनजाति की गलशन माला, बोलनी, पिथौरा चित्रशैली, झाबुआ की आदिवासी गुड़िया तथा गोंड जनजाति के पारंपरिक वाद्य यंत्र बाना-चिकारा और मुखौटा काष्ठ शिल्प शामिल हैं।आजीविका संवर्धन की दिशा में एक अभिनव पहल के रूप में पचमढ़ी, मांडू, कान्हा-किसली, पेंच और बांधवगढ़ में जनजातीय महिला कैफेटेरिया स्थापित किए जा रहे हैं। इनका संचालन जनजातीय स्व-सहायता समूहों की महिलाएं करेंगी, जिससे उन्हें रोजगार मिलेगा और जनजातीय संस्कृति का संरक्षण भी होगा।

प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के तहत 13 लाख 43 हजार से अधिक जनजातीय जनसंख्या लाभान्वित हो रही है। नौ मंत्रालयों की 11 अधोसंरचनात्मक और सात हितग्राही मूलक योजनाओं के माध्यम से अत्यंत पिछड़ी जनजातियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में लाखों आधार कार्ड, जनधन खाते, आयुष्मान कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड और राशन कार्ड बनाए गए हैं।पीएम आवास योजना के अंतर्गत अब तक 1 लाख 30 हजार से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। बिजली, सड़क, जल, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, छात्रावास और आंगनवाड़ी निर्माण से जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है।

डॉ. शाह ने कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान, आदि वाणी एप, जनजातीय होमस्टे, सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना और तकनीक आधारित योजनाओं के माध्यम से जनजातीय समाज को सशक्त बनाकर विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण की मजबूत नींव रखी जा रही है।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal