भोपाल 7फरवरी/ उज्जैन में आयोजित विक्रमोत्सव के संबंध में एसीएस शुक्ला की लेक व्यू रेजिडेंसी में पत्रकार वार्ता
12 फरवरी से 30 जून तक उज्जैन में आयोजित विक्रमोत्सव,विक्रमोत्सव-2026,139 दिनों तक संस्कृति समाज और अर्थव्यवस्था का महोत्सव,देश का सबसे बड़ा सम्मान होगा सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण।
मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेखर शुक्ला ने कहा है कि उज्जैन में आयोजित होने जा रहा ‘विक्रमोत्सव–2026’ भारतीय सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और आर्थिक गतिविधियों का ऐसा विराट उत्सव होगा, जिसकी मिसाल देश और दुनिया में विरले ही देखने को मिलेगी। यह आयोजन 12 फरवरी से 30 जून 2026 तक कुल 139 दिनों तक चलेगा। शुक्ला ने होटल लेकव्यू रेसीडेंसी में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि विक्रमोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा, वैज्ञानिक दृष्टि, लोकसंस्कृति और आर्थिक संभावनाओं को एक मंच पर लाने वाला महाआयोजन है। अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की परंपरा, न्यायप्रिय शासन, सांस्कृतिक संरक्षण और भारतीय नववर्ष की अवधारणा को केंद्र में रखकर विक्रमोत्सव का स्वरूप तय किया गया है। यह उत्सव उज्जैन को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाएगा। उन्होंने बताया कि आयोजन के अंतर्गत सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, शास्त्रार्थ, शोध संगोष्ठियाँ, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित संवाद, लोककला, साहित्य, योग, आयुर्वेद, जनजातीय परंपराएँ, पर्यटन गतिविधियाँ और आर्थिक मेले जैसे विविध आयाम शामिल किए गए हैं।
एसीएस शुक्ला ने कहा कि विक्रमोत्सव–2026 का उद्देश्य केवल अतीत की गौरवगाथा को स्मरण करना नहीं है, बल्कि उस विरासत को वर्तमान और भविष्य से जोड़ना भी है। 139 दिनों तक चलने वाला यह आयोजन कलाकारों, विद्वानों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, युवाओं और आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करेगा। इससे स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों, हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा, वहीं पर्यटन के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने कहा कि विक्रमोत्सव भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक आत्मबोध का जीवंत उत्सव है। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के माध्यम से शोध, प्रकाशन और संवाद के जरिए सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रिय और लोककल्याणकारी परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन उज्जैन को “ज्ञान और संस्कृति की राजधानी” के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने बताया कि विक्रमोत्सव में विज्ञान, गणित, खगोलशास्त्र और भारतीय वैज्ञानिक परंपराओं पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्राचीन भारतीय विज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय को दर्शाने वाली गतिविधियाँ युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगी। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा ने कहा कि विक्रमोत्सव सामाजिक और आर्थिक विचारों का भी सशक्त मंच बनेगा। भारतीय अर्थचिंतन, स्वदेशी अवधारणा और समाज-केंद्रित विकास मॉडल पर विमर्श के माध्यम से समावेशी विकास की दिशा में सार्थक संवाद स्थापित होगा।
जनजातीय संग्रहालय के संग्रहाध्यक्ष अशोक मिश्रा ने कहा कि उत्सव के दौरान जनजातीय कला, संस्कृति, जीवनशैली और परंपराओं को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे जनजातीय समाज की समृद्ध विरासत को व्यापक पहचान मिलेगी।पत्रकार वार्ता में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि विक्रमोत्सव–2026 मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला ऐतिहासिक आयोजन सिद्ध होगा और उज्जैन को वैश्विक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

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