सात वर्षों की सेवा-यात्रा का भावपूर्ण उत्सव,ब्रह्माकुमारीज़ सुख-शांति भवन, नीलबड़ में वंदे मातरम् राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूर्ण होने तथा संस्था की सात वर्षों की सेवा-यात्रा के उपलक्ष्य में भव्य वंदे मातरम् महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य “मातृशक्ति से राष्ट्रशक्ति” की भावना को सशक्त रूप में प्रस्तुत करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ नारी सशक्तिकरण पर आधारित भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति से हुआ, जिसमें नारी की आत्मिक शक्ति, त्याग और समाज निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया।कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत करते हुए राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी पंचशीला दीदी जी ने कहा कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होना एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसे देशभर में विविध आयोजनों के माध्यम से मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल भूमि का नहीं, बल्कि देश की प्रत्येक नारी के सम्मान का उद्घोष है। मातृशक्ति के बिना राष्ट्रशक्ति की कल्पना अधूरी है। उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज़ विश्व का एकमात्र आध्यात्मिक संस्थान है, जो 140 से अधिक देशों में 10,000 से अधिक सेवा केंद्रों के माध्यम से नारी शक्ति को आत्मिक रूप से जागृत कर समाज परिवर्तन का कार्य कर रहा है।

क्रिश्चियन महिला प्रभाग की अध्यक्षा बिनी जॉर्ज जी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल जागरूकता नहीं, बल्कि एकता, मानवता, प्रेम और शांति के मूल्यों को जीवन में अपनाना है। भारत की आत्मा विविधता में एकता है और हमें ऐसी पीढ़ी का निर्माण करना है जो आध्यात्मिक रूप से सशक्त, मानसिक रूप से मजबूत, सामाजिक रूप से जिम्मेदार और राष्ट्र के प्रति समर्पित हो।राष्ट्रीय हिंदी मेल की वरिष्ठ पत्रकार सादिया खान जी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कार्यक्रम के प्रारंभ में मात्र 30 सेकंड के ज्ञान-अनुभव से उन्हें गहन शांति की अनुभूति हुई। उन्होंने कहा कि व्यस्त और तनावपूर्ण दिनचर्या के बीच इतने कम समय में मानसिक सुकून मिलना उनके लिए एक विशेष अनुभव रहा। इनर व्हील क्लब (ज्यामिति क्लब) की सदस्य एवं कोषाध्यक्ष शशि शुक्ला जी ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ का नाम सुनते ही शुद्धता और शांति का भाव उत्पन्न होता है। यह स्थान आत्म-जागरण, सकारात्मकता और सेवा का संगम है। आज जब मानव तनाव और असंतुलन से जूझ रहा है, तब राजयोग आत्मज्ञान के माध्यम से भीतर से परिवर्तन का संदेश दे रहा है।

इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण संघ की अध्यक्ष पूजा परमार जी, मदर टेरेसा ग्रुप की दो सिस्टर, इस्लाम समाज से रहना जी तथा सिख समाज से सिमरन कौर जी की उपस्थिति रही। विभिन्न धर्मों की महिलाओं की सहभागिता ने कार्यक्रम को सर्वधर्म समभाव का सशक्त उदाहरण बनाया।कार्यक्रम में सुख-शांति भवन की सात वर्षों की सेवा-यात्रा पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें संस्था द्वारा किए जा रहे आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया।इस अवसर पर आदरणीय आर्सियस बिशप दुरई राजा जी द्वारा परम आदरणीय राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी चक्रधारी दीदी जी का सम्मान किया गया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई। इसके पश्चात बीके हेमा बहन द्वारा सभी को राजयोग के माध्यम से आध्यात्मिक अनुभव कराया गया, जिसमें उपस्थित जनों ने गहन शांति, सुकून और नई प्रेरणा का अनुभव किया।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता परम आदरणीय राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी चक्रधारी दीदी जी (महानिदेशक – रूस एवं संबंधित क्षेत्र, राष्ट्रीय अध्यक्षा – महिला प्रभाग) ने कहा कि एक मां अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपने सुख, आराम और सपनों तक का त्याग कर देती है। आज आवश्यकता है कि बच्चों को केवल भौतिक सफलता ही नहीं, बल्कि सुख-दुख को शांत मन से स्वीकार करने और मूल्यों के साथ जीने की शिक्षा भी दी जाए। यह संस्कार नारी ही दे सकती है। उन्होंने कहा कि समाज में प्रचलित कुप्रथाओं के बावजूद परमात्मा ने आकर नारी को उसकी वास्तविक शक्ति से परिचित कराया और उसे विश्व-कल्याण का निमित्त बनाया। भौतिक प्रगति के साथ आध्यात्मिक सशक्तिकरण को अपनाना समय की आवश्यकता है। जब मनुष्य स्वयं को शरीर नहीं, बल्कि आत्मा के रूप में समझता है, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र में सच्ची शांति और शक्ति का संचार होता है।

समापन अवसर पर सुख-शांति भवन की निदेशिका एवं बिज़नेस एंड इंडस्ट्री विंग की जोनल कोऑर्डिनेटर राजयोगिनी नीता दीदी जी ने सात वर्षों की सेवा-यात्रा साझा करते हुए कहा कि परमात्मा की शक्ति से हजारों लोगों को लाभान्वित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। समाज सेवा को उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ की सच्ची पूंजी बताया। अंत में भोपाल क्षेत्र की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका एवं महिला विंग की जोनल अध्यक्ष आदरणीय रेखा दीदी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन बड़े उमंग-उत्साह के साथ सभी को सहभागिता की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल कराते हुए बीके डॉक्टर प्रियंका एवं बीके डॉक्टर देवियानी द्वारा किया गया, जिससे पूरे वातावरण में ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता का संचार हुआ। कार्यक्रम के पश्चात सभी को ईश्वरीय सौगात एवं प्रसाद प्रदान किया गया तथा ब्रह्माभोजन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal