“Unity & Trust Through Meditation” से एकता और विश्वास का संदेश

ब्रह्माकुमारीज़ सुख-शांति भवन, नीलबड़ में सातवां वार्षिक महोत्सव गरिमामय एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य विषय “Unity & Trust Through Meditation” रहा, जिसके माध्यम से समाज में एकता, विश्वास और चरित्र निर्माण का सशक्त संदेश दिया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ की महानिदेशक व महिला प्रभाग की राष्ट्रीय अध्यक्ष परम आदरणीय राजयोगिनी चक्रधारी दीदी जी, भोपाल जोन कोऑर्डिनेटर आदरणीय निर्मला दीदी जी, एम्स भोपाल के कार्यकारी निदेशक डॉ. माधवनंदनकर, , IISM के फाउंडर एवं जागरण यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति श्री पी.के. विश्वास,  ग्लोबल सेन यूनिवर्सिटी की चांसलर श्रीमती प्रीति सलूजासैम सहित अनेक गणमान्य अतिथि, सेवाधारी भाई-बहन एवं शहर के जाने-माने उद्योगपति उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता परम आदरणीय राजयोगिनी चक्रधारी दीदी जी ने अपने संदेश में कहा कि आज संसार को एकता और विश्वास की नितांत आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने स्नेह, स्वयं का ज्ञान, सहनशीलता, एक-दूसरे के प्रति सम्मान और एक लक्ष्य के प्रति समर्पण—इन पाँच गुणों को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक व्यक्ति के लिए पूरा विश्व ही परिवार होता है और आत्मिक दृष्टि ही सच्ची एकता का आधार है।

कार्यक्रम के दौरान मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, गीत-नृत्य तथा डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से सुख-शांति भवन की सात वर्षों की सेवा-यात्रा को दर्शाया गया। कार्यक्रम की भूमिका एवं स्वागत भाषण सुख-शांति भवन की निदेशिका आदरणीय नीता दीदी जी ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि “जहाँ एकता होती है, वहाँ कार्य सहज हो जाता है। ब्रह्माकुमारी संस्थान का उद्देश्य आपसी विश्वास के आधार पर आगे बढ़ना है, क्योंकि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि परमात्मा का कार्य है।” उन्होंने बताया कि राजयोग ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने विचारों में परिवर्तन कर अपने जीवन और वातावरण को सकारात्मक दिशा दे सकता है।

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी डॉ. रीना दीदी (मीडिया विभाग प्रांतीय को-ऑर्डिनेटर एवं ब्लेसिंग हाउस मेडिटेशन सेंटर की संचालिका) ने “ओम शांति” के उद्घोष के साथ शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में संख्या सात का विशेष महत्व है—सात चक्र, सप्त ऋषि, सात फेरे एवं सात दिव्य गुण। जब मनुष्य अपने जीवन में ज्ञान, पवित्रता, सुख, शांति, आनंद, प्रेम और शक्ति को धारण करता है, तब जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त होती है। उन्होंने TEAM (Total Effort of All Members) के माध्यम से टीमवर्क के महत्व को भी रेखांकित किया। IISM के फाउंडर एवं जागरण यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति श्री पी.के. विश्वास ने कहा कि आज का विषय “Unity & Trust Through Meditation” अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि चरित्र निर्माण ही किसी भी समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है।“पहले अच्छे इंसान बनिए, अच्छे प्रोफेशनल आप स्वयं बन जाएंगे। हमारा वैल्यू सिस्टम ही हमें आगे लेकर जाता है,” उन्होंने कहा।

एम्स भोपाल के कार्यकारी निदेशक डॉ. माधवनंदनकर ने कहा कि बिना आध्यात्मिकता के आंतरिक शांति संभव नहीं। जैसे शरीर में नकारात्मक तत्वों को निकालना आवश्यक है, वैसे ही मन से नकारात्मक विचारों को हटाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहले स्वयं को बदलना ही सच्चा परिवर्तन है। कार्यक्रम के अंत में आदरणीय निर्मला दीदी जी ने शुभकामनाएँ व्यक्त कीं,तत्पश्चात आदरणीय राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी पंचशीला दीदी जी ने सभी अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन, राजयोग ध्यान अनुभव (ब्रह्माकुमारी साक्षी बहन द्वारा) एवं ईश्वरीय प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन आदरणीय भ्राता रामकुमार जी द्वारा किया गया।

न्यूज़ सोर्स : mp1news Bhopal