भोपाल 19मई/तकनीक और जनभागीदारी से सशक्त होगा जनजातीय समाज : मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह
मंत्री विजय शाह ने एक दिवसीय कार्यशाला एवं क्षमतावर्धन कार्यक्रम का किया शुभारंभ,सतत विकास तकनीक से बदलेगा जनजातीय भविष्य
मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने भोपाल स्थित आदि भवन में “जनजातीय गरिमा उत्सव” के अंतर्गत आयोजित तकनीकी आधारित सतत जनजातीय विकास अवधारणा पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं क्षमतावर्धन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, आयुक्त डॉ. सतेंद्र सिंह सहित प्रदेशभर से आए विभागीय अधिकारी एवं मैदानी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
मंत्री डॉ. विजय शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज की पीड़ा और आवश्यकताओं को गहराई से समझते हुए उनके उत्थान के लिए प्रभावी नीतियां बनाई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी योजनाएं जनजातीय समाज के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि विकास की मुख्यधारा में जनजातीय समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। डॉ. शाह ने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे गांवों और वनवासी अंचलों में जाकर जनजातीय समाज के बीच समय बिताएं, उनकी परिस्थितियों को नजदीक से समझें और उसी अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन करें। उन्होंने कहा कि केवल दफ्तरों में बैठकर योजनाओं की समीक्षा करने से वास्तविक समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। जमीनी अनुभव और संवेदनशीलता ही प्रभावी विकास का आधार बन सकती है।
उन्होंने बताया कि शासन द्वारा “जन भागीदारी - सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से 18 विभागों की 25 योजनाओं का लाभ शिविरों के जरिए दूरस्थ जनजातीय गांवों तक पहुंचाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य अंतिम छोर पर बसे लोगों तक शासन की योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करना है। मंत्री डॉ. शाह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में जनजातीय अंचलों में हो रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 1990 के दशक की तुलना में आज जनजातीय क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से सुधार हुआ है तथा जनजातीय समाज अब आत्मविश्वास के साथ विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों में 50 हजार पानी की बोतलों का वितरण किया जा रहा है। इसके साथ ही पहली से बारहवीं कक्षा तक के 45 हजार विद्यार्थियों को पेयजल हेतु पानी की बोतलें उपलब्ध कराई गई हैं। क्षेत्र की 150 ग्राम पंचायतों में वॉटर कूलर और आरओ प्लांट स्थापित किए गए हैं, जिससे ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सके। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि जनजातीय अंचलों की कई बेटियां परिवहन सुविधा के अभाव में उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती थीं। इसे ध्यान में रखते हुए उनके क्षेत्र में प्रायोगिक तौर पर चार बसों का संचालन शुरू किया गया। इस पहल से कॉलेज जाने वाली छात्राओं की संख्या 30 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि इस मॉडल को अन्य जनजातीय क्षेत्रों में भी लागू किया जाना चाहिए।
कार्यशाला में आयुक्त जनजातीय क्षेत्र विकास डॉ. सतेंद्र सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। वहीं मैनिट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संयम शुक्ला ने आजीविका और रोजगार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। आईआईएसईआर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुमार गौरव ने सतत जनजातीय विकास में जीआईएस एवं उपग्रह सुदूर संवेदन तकनीक की उपयोगिता पर अपने विचार रखे। कार्यशाला में तकनीक आधारित नवाचार, कौशल विकास, डिजिटल मॉनिटरिंग और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर व्यापक चर्चा की गई।

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