भोपाल 26फरवरी/विधानसभा में शाला मरम्मत घोटाले पर हंगामा,ध्यानाकर्षण में उठा मुद्दा
प्रदेश की शाला भवनों की मरम्मत एवं रख-रखाव में बढ़ती लापरवाही और कथित अनियमितताओं का गंभीर मामला,डीपीआई के अफसर हटे,जांच के आदेश।
मध्यप्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान नियम 138 (1) के अंतर्गत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए प्रदेश की शाला भवनों की मरम्मत एवं रख-रखाव में बढ़ती लापरवाही और कथित अनियमितताओं का गंभीर मामला सदन में जोरदार तरीके से उठाया गया। मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी और जबलपुर विधायक लखन घनघोरिया ने स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए सरकार से जवाब मांगा।
विधायकों ने उठाए गंभीर सवाल,विधायकों ने लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) द्वारा प्रदेशभर की शालाओं के मरम्मत, रख-रखाव एवं मजबूतीकरण के लिए जारी किए गए करोड़ों रुपये के उपयोग पर सवाल खड़े किए। उनका आरोप था कि इन कार्यों में न केवल पारदर्शिता की कमी रही, बल्कि बड़े स्तर पर अनियमितताएं और संभावित घोटाला सामने आया है। विधायक लखन घनघोरिया और श्रीकांत चतुर्वेदी ने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से कहा कि: शाला भवनों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य अधूरे या निम्न गुणवत्ता के हैं। कई स्थानों पर कार्य हुए ही नहीं, फिर भी भुगतान कर दिया गया। जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है और उन पर कार्रवाई जरूरी है। दोनों विधायकों ने मांग की कि लोक शिक्षण संचालनालय के जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल हटाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
मंत्री का जवाब सख्त कार्रवाई के संकेत, स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने सदन में जवाब देते हुए स्वीकार किया कि मैहर क्षेत्र में शाला मरम्मत कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने बताया कि: इस मामले में अब तक 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर संचालक डी.एस. कुशवाह और उप संचालक पी.के. सिंह को उनके पद से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। डीपीआई में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: मंत्री ने स्पष्ट किया कि लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) में कार्यरत अधिकारियों की भूमिका की गहन समीक्षा की जा रही है। विभाग में भवन संरचना कार्य संचालक डी.एस. कुशवाह और उप संचालक पी.के. सिंह द्वारा देखा जा रहा था, जबकि वित्तीय कार्यों की जिम्मेदारी राजेश मौर्य के पास थी। इन सभी की भूमिका जांच के दायरे में लाई जाएगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर सरकार का जोर मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि “जो भी अधिकारी विभागीय नीतियों के विपरीत कार्य करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” व्यापक जांच के आदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिए कि यह मामला केवल मैहर तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की अनियमितताओं की जांच की जाएगी। इसके लिए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि पूरे तंत्र में सुधार सुनिश्चित किया जा सके। सदन में गूंजा मुद्दा, बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी इस ध्यानाकर्षण के दौरान सदन में काफी देर तक बहस चली और विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। वहीं सरकार ने त्वरित कार्रवाई का हवाला देते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई तेज होगी।अन्य जिलों में भी शाला मरम्मत कार्यों की जांच संभव शिक्षा विभाग में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
मध्यप्रदेश विधानसभा में उठाया गया यह ध्यानाकर्षण प्रस्ताव न केवल शाला भवनों की स्थिति पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को भी उजागर करता है। सरकार द्वारा त्वरित कार्रवाई और जांच के आदेश यह संकेत देते हैं कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। यह मामला आने वाले दिनों में और गहराएगा,क्योंकि जांच के निष्कर्ष कई बड़े खुलासे कर सकते।

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