भोपाल 10अगस्त/तस्वीरों के आधार पर चरित्र पर सवाल न उठाएँ: लेखक राजेंद्र श्रीवास्तव
जब कोई व्यक्ति उपलब्धियों के शिखर पर पहुँचता है, तो जनमानस उसे अपने सर-आँखों पर बिठाता है। लोग उसके साथ तस्वीर खिंचवाने को गौरव मानते हैं। यह दृश्य विशेष रूप से अभिनेताओं और राजनीतिक वर्ग के लोगों के साथ अधिक देखने को मिलता है।
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण अब विशेष व्यक्तित्वों तक पहुँचना आम बात हो गई है। आज के दौर में राजनेता और अभिनेता भी उदार हृदय के हो गए हैं, जिससे आम नागरिक भी उनके साथ सहजता से तस्वीर खिंचवा सकते हैं। यह उदारता दोनों ओर से होती है,जनता सम्मान और उत्साह से अनुरोध करती है, और बड़े व्यक्तित्व भी बिना किसी भेदभाव के लोगों के साथ फोटो खिंचवाते हैं।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि जब कोई आम व्यक्ति किसी बड़े व्यक्तित्व के साथ फोटो खिंचवाने का आग्रह करता है, तो वह व्यक्तित्व उसके अतीत या पृष्ठभूमि की पड़ताल नहीं करता। उस क्षण का उद्देश्य केवल भावनाओं का सम्मान और आपसी सौहार्द का अनुभव होता है।
लेकिन, समस्या तब उत्पन्न होती है जब भविष्य में वह आम व्यक्ति किसी गैर-कानूनी गतिविधि में संलिप्त पाया जाता है या उस पर आरोप लगते हैं। ऐसे समय में कुछ मीडिया संस्थान, सोशल मीडिया उपयोगकर्ता और राजनीतिक विरोधी केवल उस तस्वीर के आधार पर बड़े व्यक्तित्व की छवि धूमिल करने का प्रयास करते हैं, मानो वह उनके अपराधों में सहभागी हों।
यह दृष्टिकोण न केवल अनुचित है, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी हानिकारक है। किसी भी बड़े नेता, अभिनेता या सार्वजनिक व्यक्ति के साथ खिंचवाई गई तस्वीर मात्र एक औपचारिकता और सम्मान का प्रतीक होती है, न कि उनके चरित्र या आपसी संबंध का प्रमाण।
आज फोटो खिंचवाना एक सामान्य सामाजिक चलन बन चुका है। लोग इन तस्वीरों को गर्व से अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर साझा करते हैं। ऐसे में केवल तस्वीर के आधार पर किसी के व्यक्तित्व या चरित्र पर प्रश्न उठाना न केवल गलत है, बल्कि समाज में अनावश्यक भ्रम और वैमनस्य पैदा करता है।
इसलिए आवश्यक है कि मीडिया, सोशल मीडिया और राजनीतिक वर्ग यह समझे कि “तस्वीरें भावनाओं का प्रतीक हैं, न कि चरित्र का प्रमाण। किसी के साथ खिंचवाई गई तस्वीर को गलत संदर्भ में प्रस्तुत कर किसी की छवि धूमिल करना सामाजिक न्याय और नैतिकता के विरुद्ध है।

आध्यात्मिक चिकित्सा: तुलसी पूजन और गो सेवा से मानसिक और शारीरिक व्याधियों का अंत
समस्याओं का अचूक समाधान हैं 'यंत्र'; जानें व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए कौन सा यंत्र है सर्वश्रेष्ठ?
कैसा होगा आपका भविष्य? हस्तरेखा शास्त्र से समझें हाथ की रेखाओं और हथेली के आकार का मेल
सिर्फ शिष्टाचार नहीं, सेहत और सौभाग्य का प्रतीक है मेहमान को पानी देना; जानें क्या कहता है शास्त्र?
भोपाल 30अप्रैल/किसानों के हित में समर्पित होकर कार्य करें कृषि कर्मयोगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव