भोपाल 21मई/मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में की पशुपालन विभाग की योजनाओं एवं अन्य गतिविधियों की समीक्षा
दुग्ध उत्पादन में लंबी छलांग, किसानों की आय में वृद्धि और सांची ब्रांड को नई पहचान देने पर सरकार का फोकस,मध्यप्रदेश को देश की “मिल्क कैपिटल” बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे कदम : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
मंत्रालय में आयोजित पशुपालन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं, दुग्ध उत्पादन, गौ-संवर्धन, पशु स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण रोजगार से संबंधित गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश को “मिल्क कैपिटल” बनाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास अब सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं और प्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव पशुपालन उमाकांत उमराव, संचालक पशुपालन डॉक्टर वीएस पटेल सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 9.67 लाख किलोग्राम दुग्ध संकलन की उपलब्धि दर्ज की गई है, जो गत वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। पिछले छह माह में औसत प्रतिदिन दुग्ध संकलन 11 लाख किलोग्राम से अधिक रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि को प्रदेश के किसानों और डेयरी क्षेत्र के लिए बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि समन्वित प्रयासों से मध्यप्रदेश अब दुग्ध उत्पादन में लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है, लेकिन सरकार का लक्ष्य प्रदेश को प्रथम स्थान पर पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रारंभ किए गए प्रयास सफल हो रहे हैं। प्रदेश में 1752 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। ग्वालियर डेयरी प्लांट के आधुनिकीकरण, शिवपुरी डेयरी प्लांट के पुनर्जीवन तथा इंदौर में प्रतिदिन 3 लाख लीटर क्षमता वाले मिल्क पाउडर प्लांट की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों ने डेयरी क्षेत्र को नई गति दी है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनू योजना, आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम, क्षीरधारा ग्राम योजना, दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान और स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना जैसे कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पशुपालन योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचे तथा विभाग नवाचार आधारित कार्ययोजना तैयार करे।मुख्यमंत्री ने पशुओं के स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पशुओं के टीकाकरण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा गांव-गांव तक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जाएं। उन्होंने चारा उत्पादन एवं उपलब्धता बढ़ाने, पशु पोषण सुधारने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक खेती और पशुपालन को एक-दूसरे से जोड़कर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मार्गदर्शन में किए गए प्रयासों से वर्ष 2025-26 में दुग्ध उत्पादकों को 1609 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। विभिन्न दुग्ध संघों में खरीद मूल्य में 2.50 रुपए से 8.50 रुपए प्रति लीटर तक वृद्धि की गई है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि का वातावरण बना है।समीक्षा बैठक में “सांची” ब्रांड को मजबूत बनाने के लिए किए गए प्रयासों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि घी की बिक्री में 17 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई है, जबकि पनीर, दही, छाछ और फ्लेवर्ड दूध जैसे मूल्य संवर्धित उत्पादों की बिक्री में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बेहतर पैकेजिंग, आधुनिक मार्केटिंग और ब्रांडिंग के जरिए सांची को नई पहचान दिलाने में सफलता मिली है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पशुपालन केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार नहीं, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार का बड़ा माध्यम भी है। उन्होंने अधिकारियों से परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति अपनाने और मध्यप्रदेश को दुग्ध उत्पादन एवं डेयरी विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

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